बड़हिया. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कथनी और करनी में जमीन आसमान का फर्क है. 2010 के चुनाव में जनता ने भाजपा-जदयू गंठबंधन को अपना जनादेश दिया था. उन्होंने जनादेश का अपमान करते हुए एकतरफा गंठबंधन तोड़ कर जनता के साथ विश्वासघात किया. क्या इसके लिए वे जनता में क्षमा याचना करेंगे. गरीब व शोषित समाज के महादलित को सीएम बनाने के कुछ ही महीने बाद उसे सरेआम अपमानित कर हटाने के लिए भी क्या वह जनता से क्षमता मांगेंगे. अपने आपको चरित्र एवं त्याग की प्रतिमूर्ति बताने वाले नीतीश कुमार ने किसी और को सीएम क्यों नहीं बनाया. वे लोकसभा चुनाव के बाद इस्तीफा देने के निर्णय को अपनी भूल बता कर जनता से क्षमा याचना की नौटंकी कर रहे हैं. रविवार को क्षेत्रीय भाजपा विधायक विजय कुमार सिन्हा ने बड़हिया नगर भाजपा कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान ये बातें कही. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार विश्वासमत हासिल करने के लिए समय क्यों ले रहे हैं. लालू और नीतीश ने एक साथ मिल कर संवैधानिक पद का अपमान किया है. नीतीश कुमार सत्ता के बगैर नहीं रह सकते. मौके पर नगर अध्यक्ष नरोत्तम कुमार, महामंत्री राजेश कुमार, भाजपा किसान मोरचा के प्रदेश नेता गोपाल चंद्र सिंह, गणेश प्रसाद सिंह, रमनीकांत ठाकुर, अनिल कुमार सिंह, पप्पू सिंह, उमाकांत सिंह, दिलीप कुमार, मणिकांत महतो, ब्रह्मचारी आदि भाजपा नेता उपस्थित थे.
नीतीश कुमार की कथनी और करनी में फर्क :भाजपा विधायक
बड़हिया. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कथनी और करनी में जमीन आसमान का फर्क है. 2010 के चुनाव में जनता ने भाजपा-जदयू गंठबंधन को अपना जनादेश दिया था. उन्होंने जनादेश का अपमान करते हुए एकतरफा गंठबंधन तोड़ कर जनता के साथ विश्वासघात किया. क्या इसके लिए वे जनता में क्षमा याचना करेंगे. गरीब व […]
