बैंकों से ऋण लेने में छूटते हैं पसीने

लखीसराय. सरकार बैंकों की व्यवस्था व कार्यप्रणाली में सुधार करने की बात करती है. लेकिन बैंकों के आला अधिकारी की शिथिलता के कारण जिले वासियों को सुविधाएं नहीं मिल रही हंै. इस कारण जिले के किसान, व्यवसायी, छात्र सहित आम लोगों को कार्य करने में काफी परेशानी हो रही है. जिले की आबादी 10 लाख […]

लखीसराय. सरकार बैंकों की व्यवस्था व कार्यप्रणाली में सुधार करने की बात करती है. लेकिन बैंकों के आला अधिकारी की शिथिलता के कारण जिले वासियों को सुविधाएं नहीं मिल रही हंै. इस कारण जिले के किसान, व्यवसायी, छात्र सहित आम लोगों को कार्य करने में काफी परेशानी हो रही है. जिले की आबादी 10 लाख से अधिक है. उसके बावजूद बैंकों के अधिकारी लोगों को ऋण मुहैया कराने में अपनी दिलचस्पी नहीं ले रहे. परिणाम स्वरूप लघु कुटीर उद्योग खोलने में व्यवसायी वर्ग को परेशानी हो रही है. यह क्षेत्र टाल व दियारा क्षेत्र के नाम से जाना जाता है. लोगों को खेती पर निर्भर रहना पड़ता है. फिर भी किसानों को केसीसी, डीजल अनुदान आदि में बैंकों द्वारा शिथिलता बरती जा रही है. अधिकांश किसान ऋण से आज भी वंचित है. किसानों को ऋण लेने की लिए बैंक कार्यालय के कई चक्कर लगाने होते हैं, फिर भी ऋण सुनिश्चित नहीं होता. बैंकों में बिचौलिये का बोलबाला है. उन्हीं के माध्यम से किसान ऋण ले पाते हैं. ऐसे में कमीशन के बाद किसानों को कम ही पैसे बचते हैं. पढ़ाई के लिए ऋण लेने में छात्रों को काफी परेशानी होती है. ऐसे में जिले के किसानों, बुद्धिजीवियों ने बैंकों को अपनी कार्यशैली में सुधार लाने की मांग की है, ताकि योजनाओं का लाभ लोगों को सुलभ हो.

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