लखीसराय : किसानों के खेत हरी भरी हो, इसके लिये कृषि विभाग एक से एक योजना का क्रियान्वयन कर रखा है. किसान के खेत में अधिक से अधिक उपज के लिये वैज्ञानिक तरीके अपनाने एवं आधुनिक यंत्र दिया जा रहा है. लेकिन जब खेत की मिट्टी ही सही नहीं हो तो फसल की उपज अच्छी कैसे हो सकती है. जिले के 40 हजार किसानों से मिट्टी जांच का नमूना लिया गया था.
मिट्टी जांच में पीएच, ईसी, जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फेट, पोटाशियम, सल्फर, जिंक, बोरोन सहित 12 सूक्ष्म पोषक तत्व की जांच किया जाना था, लेकिन जिला कृषि कार्यालय भवन स्थित मिट्टी जांच प्रयोगशाला में मात्र 6 पोषक सूक्ष्म की जांच कर लगभग 2 हजार किसानों को मिट्टी परिणाम परीक्षण प्रमाण पत्र दिया गया. यह प्रमाण पत्र जिले के रामगढ़ चौक, हलसी, लखीसराय, चानन एवं सूर्यगढ़ा के किसानों को मिला था. मिट्टी पोषक तत्व पीएच, इसी, जैविक कार्बन सहित छह पोषक तत्व की जांच की गयी. जबकि हलसी, रामगढ़चौक, चानन और लखीसराय धनहर क्षेत्र माना जाता है, लेकिन इन क्षेत्र के खेतों की पोषक तत्व की जांच नहीं की गयी.
कृषि वैज्ञानिक डीके सिंह के अनुसार मिट्टी जांच प्रयोगशाला में इस प्रकार की जांच नहीं की जाती है. मिट्टी मे इन तत्वों की कमी से खास कर धान के फसल में रोगों को भय बना रहता है. वैज्ञानिक के अनुसार अलग अलग फसलों के लिये अलग अलग पोषक तत्व का होना अनिवार्य है.
