गंगा स्वच्छता पखवाड़ा व जल महोत्सव के तहत किया श्रमदान
गंगा स्वच्छता पखवाड़ा व जल महोत्सव के तहत किया श्रमदान
By AWADHESH KUMAR | Updated at :
समाहरणालय परिसर में अधिकारियों व युवाओं ने ली स्वच्छता की शपथ, ”गांव का उत्सव, देश का महोत्सव” के साथ सुजल ग्राम की परिकल्पना होगी साकार
किशनगंज. जिला पदाधिकारी सह अध्यक्ष जिला गंगा समिति के निर्देशानुसार, बुधवार को नगर परिषद के अंतर्गत जिला समाहरणालय परिसर व देव घाट तट पर वृहद स्तर पर श्रमदान, जल अर्पण, पोस्टर विमोचन व शपथ ग्रहण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया. यह आयोजन ”गंगा स्वच्छता पखवाड़ा, 2026” (16 से 31 मार्च) व ”जल महोत्सव, 2026” (08 से 22 मार्च) के तहत किया गया.
नदियों की निर्मलता व सामुदायिक प्रबंधन पर जोर
गंगा स्वच्छता पखवाड़ा का मुख्य उद्देश्य गंगा व उसकी सहायक नदियों की अविरलता एवं निर्मलता को अक्षुण्ण बनाए रखना है. वहीं, जल महोत्सव का राष्ट्रव्यापी शुभारंभ ”जल अर्पण दिवस” के साथ किया गया है. इसका प्राथमिक लक्ष्य सामुदायिक जल प्रबंधन को सुदृढ़ करना एवं जल संरक्षण में जनभागीदारी को बढ़ावा देना है.
अधिकारियों व युवाओं की सक्रिय उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अपर समाहर्ता अमरेन्द्र कुमार पंकज उपस्थित थे. उनके साथ अनुमंडल पदाधिकारी अनिकेत कुमार, वरीय उप समाहर्ता सुनीता कुमारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी कुंदन कुमार सिंह, जिला परियोजना पदाधिकारी (जिला गंगा समिति) मंसूर आलम एवं नगर परिषद के स्वच्छता पदाधिकारी स्वरूपम राज सहित कई अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे.
जल संरक्षण के लिए किया जागरूक
इस अवसर पर सफाई कर्मियों, स्काउट एंड गाइड के स्वयंसेवकों, युवा मंडल के सदस्यों व विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभायी. स्वच्छता व जल संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया. कार्यक्रम के दौरान सामूहिक रूप से श्रमदान किया गया. जल अर्पण कर गंगा व अन्य जल स्रोतों के संरक्षण का संकल्प लिया गया. जिला परियोजना पदाधिकारी ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य समुदायों को स्थानीय जल संसाधनों के प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिये प्रेरित करना है.
नयी पहल व महिला सशक्तिकरण
यह पहल ”सुजल ग्राम” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. अभियान का नारा ”गांव का उत्सव, देश का महोत्सव” स्थानीय प्रयासों को राष्ट्रीय जन-आंदोलन का रूप देने पर बल देता है. इस दौरान विशेष रूप से युवाओं व महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित की गयी, जिससे नदियों की स्वच्छता के प्रति व्यापक जनजागरूकता उत्पन्न हो और महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिले.