अभिभावक नहीं होंगे परेशान, स्कूल पांच दुकानों के देंगे नाम

जिले में निजी विद्यालयों पर अभिभावकों से मनमानी शुल्क वसूली और स्कूल सामग्री की जबरन खरीद कराने की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी विशाल राज ने कड़ा रुख अपनाया है

-बच्चों के साम्रगी की खरीदारी के लिए पांच दुकानों का नाम करना होगा सार्वजनित

-निजी स्कूलों को लेकर डीएम ने जारी किए गाइड लाइन.

-शिक्षा के अधिकार अधिनियम का स्कूलों को करना होगा पालन.

किशनगंज

जिले में निजी विद्यालयों पर अभिभावकों से मनमानी शुल्क वसूली और स्कूल सामग्री की जबरन खरीद कराने की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी विशाल राज ने कड़ा रुख अपनाया है. लगातार समाचार पत्रों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से यह सूचना मिल रही थी कि जिले के कई निजी विद्यालय फीस के अलावा किताबें, यूनिफॉर्म, बैग, जूते, कॉपियां और अन्य स्टेशनरी सामग्री अत्यधिक कीमत पर बेच रहे हैं. इतना ही नहीं कई विद्यालय अभिभावकों को केवल निर्धारित दुकानों से ही सामग्री खरीदने के लिए बाध्य कर रहे थे.

निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक थे परेशान

कई अभिभावकों ने शिकायत की कि स्कूल द्वारा निर्धारित दुकानों पर बाजार से 30 से 50 प्रतिशत तक अधिक कीमत पर किताबें और यूनिफॉर्म बेची जा रही हैं. इससे अभिभावकों में नाराजगी और असंतोष बढ़ रहा था, वहीं कई परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना कठिन होता जा रहा था. जिला प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता लिया.

प्रत्येक विद्यालय को पांच दुकानों की सूची प्रदर्शित करनी होगी

प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब जिले के सभी निजी विद्यालयों को कई महत्वपूर्ण निर्देशों का पालन करना होगा. सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह है कि कोई भी विद्यालय संचालक या प्राचार्य विद्यार्थियों को किसी एक दुकान से यूनिफॉर्म, जूते, टाई, किताब, कॉपी या अन्य स्टेशनरी सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा. प्रत्येक विद्यालय को कम से कम पांच दुकानों की सूची तैयार करनी होगी, जहां स्कूल से संबंधित सभी सामग्री उपलब्ध हो. इस सूची को विद्यालय के सूचना पट्ट और वेबसाइट पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा. ताकि अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार किसी भी दुकान से सामग्री खरीद सकें. इसके अलावा सभी निजी विद्यालयों को प्रत्येक कक्षा के लिए निर्धारित पुस्तकों की सूची और यूनिफॉर्म का पूरा विवरण 15 अप्रैल से पहले अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना होगा और विद्यालय परिसर में सार्वजनिक स्थान पर चस्पा करना होगा. इससे अभिभावकों को पहले से जानकारी मिल सकेगी और वे बाजार से कीमत की तुलना कर सस्ती सामग्री खरीद सकेंगे.

एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश यह भी दिया गया है कि विद्यालय यूनिफॉर्म में और किताब में बार-बार बदलाव नहीं करेंगे. यूनिफॉर्म कम से कम तीन वर्षों तक एक समान रहेगा. कई स्कूल हर साल यूनिफॉर्म में थोड़ा बदलाव कर देते थे और हर साल कुछ किताब भी बदल देते हैं.

आदेश का सख्ती से हुआ पालन तो अभिभावकों को मिलेगी बड़ी राहत

यदि कोई विद्यालय अभिभावकों को निर्धारित दुकान से सामान खरीदने के लिए मजबूर करता है या मनमानी कीमत वसूलता है, तो विद्यालय के प्राचार्य, संचालक, प्रबंधक और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सभी सदस्य जिम्मेदार माने जाएंगे और उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

क्या बोले अभिभावक

अभिभावकों का कहना है कि निजी विद्यालयों द्वारा किताब, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी के नाम पर हर साल हजारों रुपये अतिरिक्त वसूले जाते हैं. कई बार स्कूल प्रबंधन और दुकानदारों के बीच कमीशन का खेल चलता है, जिसका सीधा बोझ अभिभावकों पर पड़ता है. प्रशासन के इस आदेश से अभिभावकों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है.

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By AWADHESH KUMAR

AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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