बूढ़ी डांगी नदी के बहाव क्षेत्र में मिट्टी भराई से बढ़ा बाढ़ का खतरा, किसानों में रोष
बूढ़ी डांगी नदी के बहाव क्षेत्र में मिट्टी भराई से बढ़ा बाढ़ का खतरा, किसानों में रोष
ठाकुरगंज बाईपास निर्माण: नदी की धारा रोकने का आरोप जांच में पाया गया सही
ठाकुरगंज. ठाकुरगंज में निर्माणाधीन बाईपास को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है. बूढ़ी डांगी नदी की प्राकृतिक धारा में ही निर्माण कार्य किए जाने का आरोप अब जांच में सही साबित होता दिख रहा है. बुधवार को वरीय उप समाहर्ता मो उमेर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की. जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि नदी की बहती धारा के करीब 40-50 फीट हिस्से में मिट्टी भराई कर निर्माण कार्य चल रहा है. यह न केवल नियमों की अनदेखी को दर्शाता है, बल्कि मानसून के दौरान बाढ़ और जलभराव के बड़े खतरे की चेतावनी भी है.
किसानों की आजीविका पर संकट
स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर निर्भर है. नदी का प्राकृतिक बहाव बाधित होने से खेतों में पानी भर जाएगा व फसलें बर्बाद हो जाएंगी. इससे हजारों लोगों की आजीविका संकट में पड़ सकती है. सबसे गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि जब नदी से सटी बिहार सरकार की पर्याप्त खाली जमीन उपलब्ध है, तो आखिर नदी की धारा पर ही निर्माण क्यों किया गया.
जांच टीम का आश्वासन व स्थानीय असंतोष
जांच टीम ने मौके पर मौजूद लोगों को आश्वासन दिया कि नदी के बहाव के लिए लगभग 50 फीट जमीन छोड़ी जाएगी. भविष्य में जरूरत होने पर दूसरी दिशा से भूमि अधिग्रहण किया जाएगा. जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. इसके बावजूद, स्थानीय लोगों में आरसीडी के प्रति गहरा असंतोष है. उनका मानना है कि पहले नदी को नुकसान पहुँचाया गया और अब सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है.
पर्यावरण व सुरक्षा से जुड़ी चिंता
शिकायतकर्ता कौशल यादव ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक निर्माण कार्य का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरण, किसानों की जिंदगी और बाढ़ सुरक्षा से जुड़ा है. यदि समय रहते सही कदम नहीं उठाए गये, तो यह बाईपास सड़क भविष्य में ठाकुरगंज के लिए आपदा का कारण बन सकती है. स्थानीय लोग अब निर्माण की दिशा बदलने और नदी को पूर्ववत स्वरूप में लाने की मांग कर रहे हैं.