करोड़ों की लागत से बना गंधर्वडांगा उप स्वास्थ्य केंद्र खुद पड़ा बीमार

करोड़ों की लागत से बना गंधर्वडांगा उप स्वास्थ्य केंद्र खुद पड़ा बीमार

बदहाली. न सड़क, न बिजली-पानी, गंदगी व झाड़ियों के बीच हो रहा मरीजों का इलाज

नरेंद्र गुप्ता, दिघलबैंक

किशनगंज जिला अंतर्गत दिघलबैंक प्रखंड के गंधर्वडांगा में ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर निर्मित उप स्वास्थ्य केंद्र आज सफेद हाथी साबित हो रहा है. अस्पताल भवन की बदहाली, चारों ओर फैली गंदगी व बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने सरकारी दावों व निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं.

बिना पहुंच मार्ग व योजना के खड़ा कर दिया भवन

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस केंद्र का निर्माण बिना किसी ठोस योजना के नदी किनारे कर दिया गया. अस्पताल तक पहुंचने के लिए आज तक पक्की सड़क तक नहीं नसीब हुई. आलम यह है कि बाढ़ के दिनों में पूरा परिसर जलमग्न हो जाता है, जिससे अस्पताल का संचालन पूरी तरह ठप हो जाता है. ऐसे में करोड़ों की सरकारी राशि का कोई लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है.

जर्जर शौचालय व गंदगी का अंबार

अस्पताल के भीतर की स्थिति और भी भयावह है. टॉयलेट, बाथरूम और वाश बेसिन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं. फर्श पर पसरी गंदगी, टूटे सामान और दुर्गंध ने यहां बैठना मुश्किल कर दिया है. न बिजली की व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की. सफाईकर्मी की तैनाती नहीं होने से शौचालय और कमरे कूड़ेदान में तब्दील हो गए हैं. परिसर के चारों ओर जंगली झाड़-झंखाड़ उग आए हैं, जिससे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है.

शिकायत के बाद पहुंचे डॉक्टर, पर संसाधन गायब

महाकाल सेना के युवाओं ने बताया कि लंबे समय तक बंद रहने के बाद जिला पदाधिकारी के निर्देश पर यहां एक चिकित्सक, एएनएम और परिचारी की नियुक्ति तो की गई, लेकिन संसाधनों के बिना वे भी लाचार हैं. डॉक्टर नियमित आते जरूर हैं, लेकिन मरीजों को गंदगी और बदबू के बीच बैठकर इलाज कराना पड़ता है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब पहुंच मार्ग, बिजली-पानी और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.

कहते हैं प्रभारी चिकित्सक

इस बाबत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दिघलबैंक के प्रभारी चिकित्सक डॉ इनामुल हक ने बताया कि उप स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली को लेकर विभाग को कई बार अवगत कराया गया है. लेकिन अब तक न तो कोई विशेष फंड मिला है और न ही आवश्यक कर्मियों की तैनाती हुई है. संसाधनों की भारी कमी के कारण व्यवस्था में सुधार करने में कठिनाई हो रही है.

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By AWADHESH KUMAR

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