बाढ़ में ध्वस्त हुई मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क की नहीं बदली सूरत, ग्रामीण आक्रोशित
बाढ़ में ध्वस्त हुई मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क की नहीं बदली सूरत
By AWADHESH KUMAR | Updated at :
घनीफूलसरा से बिहार टोला को जोड़ने वाला मार्ग बदहाल, जोखिम भरी आवाजाही से ग्रामीण खुद को मुख्यधारा से कटा महसूस कर रहे
किशनगंज. टेढ़ागाछ प्रखंड के चिल्हनिया पंचायत अंतर्गत घनीफूलसरा से बिहार टोला वार्ड संख्या-15 को जोड़ने वाली मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क इन दिनों बदहाली की मिसाल बनी हुई है. विगत वर्ष आई भीषण बाढ़ के दौरान इस महत्वपूर्ण सड़क का एक बड़ा हिस्सा बीचों-बीच से पूरी तरह ध्वस्त हो गया था. बाढ़ बीते कई माह हो चुके हैं, लेकिन आज तक न तो संबंधित विभाग और न ही निर्माण से जुड़े संवेदक ने इसकी मरम्मत की दिशा में कोई ठोस पहल की है. इससे स्थानीय ग्रामीणों में गहरा असंतोष व्याप्त है.
ग्रामीणों की जीवनरेखा पर संकट
यह सड़क बिहार टोला के सैकड़ों ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा के समान है. इसी मार्ग से मजदूर रोजी-रोटी के लिए बाहर जाते हैं, किसान अपने खेतों तक पहुंचते हैं और स्कूली बच्चे प्रतिदिन आवागमन करते हैं. सड़क के टूट जाने से सबसे अधिक परेशानी बीमारों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में हो रही है. बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं, जब टूटी सड़क पर पानी भरने से फिसलन और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है.
प्रशासनिक अनदेखी से बढ़ा रोष
स्थानीय ग्रामीण अजय ऋषिदेव, कैला ऋषिदेव, सुरेश ऋषिदेव, श्यामा देवी, कुन्ती देवी सहित अन्य लोगों ने बताया कि सड़क की दुर्दशा को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है. ग्रामीणों का आरोप है कि संवेदक द्वारा अब तक स्थल का निरीक्षण तक नहीं किया गया है, जो उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है. सड़क की जर्जर स्थिति के कारण चारपहिया वाहनों का इस मार्ग से गुजरना लगभग नामुमकिन हो गया है.
आंदोलन की चेतावनी
सड़क के जर्जर होने से बच्चों की शिक्षा, किसानों की खेती और मजदूरों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है. ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र पुनर्निर्माण कार्य शुरू कराया जाए. साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे.