बिहार शिक्षा विभाग द्वारा जारी की गई नवीनतम "Surplus Data of Kishanganj" रिपोर्ट ने किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों (कक्षा 1 से 5) में शिक्षकों के पदस्थापन की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है. आधिकारिक आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि एक ओर जहां प्रखंड के कई प्राथमिक स्कूलों में छात्र संख्या की तुलना में आवश्यकता से अधिक (सरप्लस) शिक्षक तैनात हैं, वहीं दूसरी ओर दर्जनों ऐसे स्कूल भी हैं जहां सैकड़ों बच्चों के नामांकन के बावजूद शिक्षकों का भारी टोटा बना हुआ है.
1. कहाँ शिक्षकों की सबसे अधिक कमी? (Deficit Schools)
रिपोर्ट के अनुसार छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) के मानकों पर ठाकुरगंज के कई स्कूल बुरी तरह प्रभावित हैं:
- पीएस जियापोखर: यहाँ 451 नामांकित विद्यार्थियों के पठन-पाठन के लिए 12 शिक्षकों की आवश्यकता है, लेकिन मात्र 8 शिक्षक ही कार्यरत हैं (4 शिक्षकों की कमी).
- एनपीएस मतीनटोला व एनपीएस बाबनगांव: इन दोनों प्राथमिक विद्यालयों में 3-3 शिक्षकों की कमी दर्ज की गई है.
- अन्य प्रभावित स्कूल: एनपीएस भेलागुड़ी, पीएस मौलानी, पीएस गोविंदपुर, पीएस नेजागाछ, एनपीएस मुरगीहारा तथा एनपीएस नाइबस्ती में भी तय मानक से कम शिक्षक पदस्थापित हैं.
2. कहाँ आवश्यकता से अधिक तैनात हैं शिक्षक? (Surplus Schools)
इसके ठीक विपरीत, प्रखंड के कई ऐसे स्कूल भी हैं जहाँ सीमित नामांकन के बावजूद जरूरत से ज्यादा शिक्षक सेवाएं दे रहे हैं:
- 3-3 अतिरिक्त शिक्षक: एनपीएस बसीरनगर, पीएस कठालडांगी, पीएस पेटभरी और पीएस भातढाला में आवश्यकता से 3-3 शिक्षक अधिक (Surplus) पाए गए हैं.
- अन्य सरप्लस स्कूल: एनपीएस बेलबाड़ी, पीएस ढापोड़ांगी, पीएस खौसीडांगी और पीएस नूरी बस्ती में भी मानक से अधिक शिक्षकों की तैनाती है.
3. "SHIFTED" और भूमिहीन विद्यालयों के आंकड़े व स्थिति
रिपोर्ट में ठाकुरगंज प्रखंड के लगभग 22 प्राथमिक विद्यालयों के नाम के आगे "SHIFTED" अंकित किया गया है. इनमें एनपीएस बसीरनगर, बस्ता, भेरभेरी, गोठरा (वार्ड-07), ग्वालबस्ती, हरिन डब्बल गार्डनकट्टा, हसनपुर, झांटीबाड़ी, झापरताल (शिशागाछी), खोको बस्ती, कारगिल बस्ती, लोधाबाड़ी, महेशपुर-2 (खरूदाह), मतीनटोला, ननकार, नौडूबा फाटक सिंह टोला, नई मुंशीभिट्ठा, निचानबस्ती (चमकिया भीठा), पथमारी नया टोला, साहुगाछ, सकढाला जलेबिया मोड़ तथा सालगुड़ी शामिल हैं.
इन SHIFTED स्कूलों की स्थिति भी एक समान नहीं है:
| श्रेणी (Category) | विद्यालयों के नाम |
| 3 शिक्षक अधिक (Surplus) | एनपीएस बसीरनगर |
| 2-2 शिक्षक अधिक (Surplus) | एनपीएस लोधाबाड़ी, एनपीएस नौडूबा फाटक |
| 3 शिक्षकों की कमी (Deficit) | एनपीएस मतीनटोला |
| 2 शिक्षकों की कमी (Deficit) | एनपीएस झापरताल (शिशागाछी) |
| 1-1 शिक्षक की कमी (Deficit) | एनपीएस नई मुंशीभिट्ठा, भेरभेरी, हरिन डब्बल गार्डनकट्टा, खोको बस्ती |
| मानक के अनुरूप (Balanced) | बस्ता, गोठरा (वार्ड-07), ग्वालबस्ती, हसनपुर, झांटीबाड़ी, महेशपुर-2, पथमारी नया टोला, साहुगाछ, सालगुड़ी |
4. प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर खड़े होते बड़े सवाल
यह रिपोर्ट शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्न चिन्ह लगाती है:
- संतुलन में देरी क्यों? जब एक ही प्रखंड में कहीं शिक्षक सरप्लस हैं और कहीं भारी कमी, तो अब तक पारदर्शी व संतुलित पदस्थापन (Rationalization) क्यों नहीं हो पाया?
- मर्ज करने का आदेश फिर भी दूरी? राज्य सरकार द्वारा भूमिहीन प्राथमिक स्कूलों को निकटतम विद्यालयों में विलय (Merge) करने का स्पष्ट आदेश जारी है, तो इन "SHIFTED" श्रेणी वाले स्कूलों का अब तक पूर्ण समायोजन क्यों अटका हुआ है?
मध्य विद्यालयों (कक्षा 6 से 8) की रिपोर्ट आना अभी बाकी
उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग ने फिलहाल केवल प्राथमिक स्तर की रिपोर्ट साझा की है. मध्य विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता, सरप्लस और डेफिसिट के आंकड़े जारी होना अभी बाकी है.
यदि विभाग इन आंकड़ों के आधार पर सरप्लस और डेफिसिट शिक्षकों का तार्किक व वैज्ञानिक समायोजन कर दे, तो बिना किसी नई बहाली के भी दर्जनों स्कूलों में शिक्षकों की कमी को तुरंत दूर किया जा सकता है, जिसका सीधा लाभ हजारों छात्र-छात्राओं को मिलेगा.
