अंतरराष्ट्रीय सीमा से पहले ही थम गई सड़कें, कैसे बनेगा कस्टम कार्यालय

किशनगंज जिले के भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक पहुंचने से पहले ही सड़कें या तो खत्म हो जाती है या फिर दूसरे दिशा में मुड़ जाती है

-स्टेट हाईवे 99 का निर्माण सीमा से चार किलोमीटर पहले तक ही हुई

किशनगंज

किशनगंज जिले के भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक पहुंचने से पहले ही सड़कें या तो खत्म हो जाती है या फिर दूसरे दिशा में मुड़ जाती है. जिससे सड़क निर्माण योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है. जिस दिघलबैंक को सीमावर्ती व्यापार और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, वहीं तक पहुंचने वाली मुख्य सड़कें ही अधूरी रह गई हैं. स्थिति यह है कि स्टेट हाईवे-99 दिघलबैंक से करीब चार किलोमीटर पहले हरुआडांगा में ही समाप्त हो जाती है, जबकि भारत-नेपाल सीमा सड़क भी लगभग डेढ़ किलोमीटर पहले ही दूसरे दिशा में मुड़ जाती है. लिहाजा अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक जाने वाली डेढ़ किलोमीटर सड़क फिर संकरी रह गई है. ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि जब सड़कें ही गंतव्य तक नहीं पहुंच रही हैं तो यहां प्रस्तावित कस्टम कार्यालय आखिर कैसे कार्य करेगा.

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में गलगलिया के अलावा कोई दूसरा आधिकारिक रूट नेपाल से नहीं जुड़ा है. दिघलबैंक को सीमा व्यापार के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की बात लंबे समय से हो रही है. कस्टम कार्यालय खोलने की चर्चाएं भी कई बार हुईं, ताकि नेपाल के साथ व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके और सीमावर्ती इलाके में रोजगार के अवसर पैदा हों. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बुनियादी ढांचा आज भी अधूरा पड़ा है. दिघलबैंक सीमा तक पहुंचने के लिए बनी स्टेट हाईवे-99 का अधूरा निर्माण परेशानी का कारण बना हुआ है. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि कस्टम कार्यालय बन भी जाता है तो वहां तक मालवाहक वाहनों की आवाजाही कैसे संभव होगी. क्योंकि पूर्व में जिले के सांसद डॉ मो जावेद आजाद ने लोकसभा में दिघलबैंक में कस्टम कार्यालय खोलने की मांग रखी थी जिस पर सरकार ने संकरी सड़क होने का हवाला दिया था. अब जबकि सीमा तक दो अलग अलग सड़क निर्माणाधीन है (स्टेट हाईवे 99 और इंडो नेपाल बॉर्डर रोड) लेकिन सीमा तक कोई सड़क नहीं पहुंच रही है. ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को कई बार उठाया है.

अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस ओर कब गंभीर पहल करते हैं. क्योंकि जब सड़क ही सीमा तक नहीं पहुंचेगी, तो सीमा व्यापार, सुरक्षा और कस्टम कार्यालय जैसे बड़े और चिर प्रतिक्षित मांग कैसे पूरी होगी.

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By AWADHESH KUMAR

AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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