ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Railway Station Road: किसी भी विकासशील शहर की पहली पहचान उसके रेलवे स्टेशन और उससे जुड़ी मुख्य संपर्क सड़कों से होती है. देश-दुनिया से आने वाले मुसाफिर जैसे ही स्टेशन से बाहर कदम रखते हैं, वे वहीं से पूरे शहर की व्यवस्था, नागरिक चेतना, स्वच्छता और स्थानीय विकास का आकलन करने लगते हैं. लेकिन किशनगंज जिले के ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन की कहानी इसके ठीक उलट है. स्टेशन के पूर्वी मुख्य द्वार से बाहर निकलते ही जो बदरंग तस्वीर सामने आती है, वह नगर परिषद और स्थानीय प्रशासन के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है. अतिक्रमण, कचरे के ढेर, बदबूदार जलजमाव और ई-रिक्शा (टोटो) की अव्यवस्थित पार्किंग के चलते पूरी स्टेशन रोड बदइंतजामी का बड़ा अड्डा बन चुकी है.
स्टेशन के पूर्वी द्वार पर टोटो चालकों का ‘कब्जा’, मुसाफिर परेशान
स्टेशन रोड की बदहाली और आम जनता को हो रही फजीहत का सिलसिलेवार विवरण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से देखा जा सकता है:
- निकास मार्ग पर बाधा: स्टेशन के मुख्य निकास मार्ग (एक्जिट पॉइंट) पर सुबह से लेकर देर रात तक टोटो चालकों की लंबी कतारें आड़ी-तिरछी खड़ी रहती हैं. ट्रेन आते ही सवारी बैठाने की अंधी होड़ शुरू हो जाती है, जिससे स्टेशन से बाहर निकलने वाले रेल यात्रियों को अपने भारी सामान के साथ पैदल निकलने में भी भारी मशक्कत करनी पड़ती है.
- अतिक्रमण से सिमटी सड़क: स्टेशन रोड के दोनों पटरियों (किनारों) पर वर्षों से जारी अवैध अतिक्रमण ने मुख्य सड़क को संकरा कर दिया है. कई रसूखदारों और दुकानदारों ने अपनी अस्थायी दुकानें, गुमटियां और अन्य ढांचे मुख्य सड़क तक बढ़ा लिए हैं. इसके कारण दो बड़े वाहनों का एक साथ गुजरना तो दूर, पैदल यात्रियों के लिए भी जगह नहीं बची है.
हल्की बारिश में ही ‘टापू’ बन जाती है सड़क, नालियां हैं जाम
सफाई व्यवस्था ध्वस्त: स्टेशन रोड की सबसे बड़ी समस्या यहाँ की ड्रेनेज (जलनिकासी) व्यवस्था का पूरी तरह फेल होना है. सड़क किनारे नियमित रूप से कचरे का उठाव न होने से गंदगी का अंबार लगा रहता है. नालियों की अपर्याप्त सफाई और सिल्ट (कीचड़) न निकालने के कारण हल्की सी मानसूनी फुहार पड़ते ही पूरी सड़क पर नाले का गंदा पानी बहने लगता है. इस जलजमाव और कीचड़ के बीच से होकर गुजरना राहगीरों के लिए किसी सजा से कम नहीं है.
शहर के ‘प्रवेश द्वार’ को बचाने के लिए संयुक्त प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
जनता की अपील और प्रशासनिक सुस्ती:
प्रतिदिन ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर सीमांचल और पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल व नेपाल के हजारों यात्रियों का आवागमन होता है. स्टेशन के बाहर का यह डरावना और अव्यवस्थित माहौल ठाकुरगंज नगर की पहली छवि (फर्स्ट इम्प्रेशन) को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है.
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों, बुद्धिजीवियों और व्यापारियों ने अनुमंडल प्रशासन, रेलवे विभाग और ठाकुरगंज नगर परिषद से संयुक्त रूप से एक विशेष अभियान चलाने की पुरजोर मांग की है. नगरवासियों ने मुख्य रूप से तीन मांगें उठाई हैं:
- एंटी-अतिक्रमण ड्राइव: स्टेशन रोड के दोनों किनारों से सभी अस्थायी और स्थायी अवैध ढांचों को तुरंत बुलडोजर चलाकर साफ किया जाए.
- स्वतंत्र टोटो स्टैंड: रेलवे और नगर परिषद मिलकर स्टेशन परिसर के पास टोटो के लिए एक अलग, व्यवस्थित पार्किंग जोन चिन्हित करे ताकि मुख्य द्वार खाली रह सके.
- नियमित सफाई व पक्की नाली: जलजमाव से मुक्ति के लिए स्टेशन रोड की नालियों का जीर्णोद्धार किया जाए और डस्टबिन लगाकर रोजाना कचरा उठाया जाए.
ठाकुरगंज के निवासियों का कहना है कि यदि प्रवेश द्वार ही बदहाली का शिकार रहेगा, तो पूरे नगर की साख कभी नहीं सुधर सकती. अब देखना यह है कि संबंधित विभागों के आला अधिकारी कुंभकर्णी नींद से कब जागते हैं और स्टेशन रोड की सूरत बदलने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं.
