किशनगंज : बिहार में 17 अगस्त से शुरू हुई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था की ठाकुरगंज में शुरुआत बेहद धीमी रही है. नई व्यवस्था लागू होने के आठ दिनों में अब तक सिर्फ एक रजिस्ट्री हो सकी है. जबकि इससे पहले ठाकुरगंज निबंधन कार्यालय में सामान्य तौर पर प्रतिदिन 60 से 70 रजिस्ट्री होती थीं. रजिस्ट्री की संख्या में आई भारी गिरावट से नई व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं.
आठ दिन में सिर्फ एक रजिस्ट्री
17 अगस्त से पेपरलेस रजिस्ट्री शुरू होने के बाद आठ दिनों में केवल एक रजिस्ट्री होना सामान्य प्रक्रिया की तुलना में बड़ी गिरावट है. पहले जहां निबंधन कार्यालय में रोजाना कातिबों और रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोगों की भीड़ रहती थी, वहीं अब कार्यालय में गतिविधियां काफी कम दिखाई दे रही हैं.
कातिबों के सामने डिजिटल प्रक्रिया की चुनौती
नई व्यवस्था में दस्तावेज तैयार करने से लेकर रजिस्ट्री की आगे की कार्रवाई तक डिजिटल प्रक्रिया पर निर्भरता बढ़ गई है. वर्षों से कागजी प्रक्रिया के जरिए काम कर रहे कातिबों को अब नई तकनीक और डिजिटल सिस्टम के अनुरूप काम करना पड़ रहा है. शुरुआती दौर में तकनीकी जानकारी की कमी और सिस्टम से जुड़ी परेशानियां भी सामने आ रही हैं.
सर्वर और इंटरनेट की समस्या भी बनी बाधा
नई व्यवस्था में रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होने के कारण सर्वर और इंटरनेट से जुड़ी तकनीकी समस्याएं भी काम की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं. इसके चलते कातिबों के साथ-साथ रजिस्ट्री कराने के लिए कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
आम लोगों को प्रक्रिया समझने में हो रही परेशानी
रजिस्ट्री कराने पहुंच रहे कई लोगों को नई व्यवस्था में दस्तावेज तैयार करने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लेकर जानकारी का अभाव है. पुरानी कागजी व्यवस्था की तुलना में डिजिटल प्रक्रिया में बदलाव के कारण लोगों को शुरुआती दौर में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
डिजिटल व्यवस्था शुरू, रफ्तार पर सवाल
पेपरलेस रजिस्ट्री का उद्देश्य निबंधन प्रक्रिया को आधुनिक और डिजिटल बनाना है. हालांकि, ठाकुरगंज में शुरुआती आठ दिनों के आंकड़े इसकी रफ्तार पर सवाल खड़े कर रहे हैं. पहले जहां रोजाना 60 से 70 रजिस्ट्री होती थीं, वहां आठ दिनों में सिर्फ एक रजिस्ट्री होना बताता है कि नई व्यवस्था को सामान्य गति पकड़ने में अभी समय लग सकता है.
