मोतीबाग में 5 एकड़ जमीन में फैला कचरे का अंबार : कीचड़, धुएं और दुर्गंध से त्रस्त लोग

Motibagh Garbage Dump Crisis: किशनगंज के मोतीबाग में पांच एकड़ क्षेत्र में कचरा डंपिंग से स्थानीय लोग परेशान हैं. जहरीले धुएं, दुर्गंध और बढ़ते प्रदूषण को लेकर नगर परिषद पर सवाल उठ रहे हैं.

किशनगंज से राहुल कुमार की रिपोर्ट

Motibagh Garbage Dump Crisis: नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-7 स्थित मोतीबाग में रहने वाले सैकड़ों परिवार वर्षों से कचरे के पहाड़, जहरीले धुएं और असहनीय दुर्गंध के बीच जीवन गुजारने को मजबूर हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूरे शहर का कचरा मोतीबाग स्थित लगभग पांच एकड़ जमीन पर डंप किया जाता है, जिससे क्षेत्र गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है.

दुर्गंध और धुएं से मुश्किल हुआ जीवन

स्थानीय निवासियों का कहना है कि कचरे के ढेर से उठने वाली बदबू दिन-रात पूरे इलाके में फैली रहती है. इसके कारण लोगों का घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है. मक्खी और मच्छरों का प्रकोप भी लगातार बढ़ रहा है.

लोगों का आरोप है कि कचरे के ढेर को कम दिखाने के लिए समय-समय पर उसमें आग लगा दी जाती है. इससे निकलने वाला धुआं आसपास के घरों तक पहुंचता है और लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है.

बच्चे, बुजुर्ग और मरीज सबसे अधिक प्रभावित

मोहल्ले के लोगों के अनुसार जहरीले धुएं का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा के मरीजों पर पड़ रहा है. कई परिवारों ने बताया कि धुएं और दुर्गंध के कारण खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने के बावजूद राहत नहीं मिलती.

स्थानीय निवासी बबलू महतो, छोटू कुमार समेत कई लोगों ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे दूसरे स्थान पर नहीं जा सकते. ऐसे में उन्हें मजबूरी में इसी माहौल में रहना पड़ रहा है.

बारिश में और गंभीर हो जाती है समस्या

बरसात के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है. कचरे से निकलने वाला गंदा और काला पानी आसपास के क्षेत्रों में फैल जाता है, जिससे दुर्गंध कई गुना बढ़ जाती है. लोगों का कहना है कि इससे जल स्रोतों के प्रदूषित होने का भी खतरा बना रहता है.

स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में खांसी, सांस फूलने और अस्थमा जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

लोगों ने उठाए गंभीर सवाल

मोतीबाग के निवासियों का कहना है कि यदि पूरे शहर का कचरा उनके क्षेत्र में डंप किया जाएगा तो वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की जिम्मेदारी कौन लेगा. उनका आरोप है कि वर्षों से समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है.

प्रशासन से की त्वरित कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, नगर परिषद और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. लोगों ने मोतीबाग में कचरा डंपिंग बंद करने, बंद पड़ी कचरा प्रोसेसिंग मशीनों को चालू कराने तथा प्रभावित परिवारों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और उपचार की व्यवस्था करने की मांग की है.

निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो यह केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्या का रूप ले सकता है.

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Published by: Shruti Kumari

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