-गलगलिया में कार्रवाई से खुला “खनन माफिया” का जाल, कई जिलों तक फैले नेटवर्क की आशंका ठाकुरगंज
जिले में अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान गलगलिया चेकपोस्ट पर हुई कार्रवाई ने फर्जी चालान के सहारे चल रहे बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने सघन जांच के दौरान एक हाइवा को जब्त किया हे, बताते चले जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चल रहे विशेष अभियान के तहत बंगाल की ओर से आने वाले वाहनों की जांच की जा रही थी. इसी क्रम में एक हाइवा को रोककर पूछताछ की गई. चालक ने वाहन में खनिज लोड होने की बात स्वीकार करते हुए मोबाइल पर एक डिजिटल चालान दिखाया, लेकिन जांच में वह फर्जी पाया गया. सख्ती से पूछताछ करने पर चालक ने दूसरा चालान प्रस्तुत किया, जिससे संदेह और गहरा गया. इसके बाद पुलिस ने वाहन को जब्त कर चालक को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार चालक की पहचान अजय दयाल (29 वर्ष), निवासी बेनुचोरी, थाना तीसरी, जिला गिरिडीह (झारखंड) के रूप में हुई है. इस संबंध में गलगलिया थाना में कांड दर्ज कर वाहन मालिक एवं अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. गलगलिया चेकपोस्ट पर हुई इस कार्रवाई ने सिर्फ एक गाड़ी नहीं पकड़ी, बल्कि उस पूरे सिस्टम की झलक दिखा दी जिसमें फर्जी चालान के सहारे खनिज (गिट्टी, बालू, पत्थर) का खेल धड़ल्ले से चलता है.फर्जी चालान में कौन-कौन शामिल होते हैं
असली खेल शुरू होता है खनन माफिया -सप्लायर से, यही लोग अवैध खनन करवाते हैं फिर दलाल (मिडलमैन) खदान से लेकर ट्रांसपोर्ट तक पूरा लिंक जोड़ते हैं, चालान मैनेज करने का इंतजाम भी यही करते हैं, इसके बाद कहानी फर्जी चालान बनाने वालों तक पहुंचती है ये लोग कंप्यूटर व मोबाइल से चालान एडिट या तैयार करते हैं, जिसमें क्यूआर, नंबर, तारीख सब सेट कर देते हैं. फिर इस खेल में शामिल होते है वाहन मालिक या ट्रांसपोर्टर, ये लोग ज्यादा कमाई के लिए जानबूझकर शामिल रहते हैं और एक चालान पर कई ट्रिप करवाते हैं फिर बारी आती है खरीदार की ये लोग सस्ता माल लेने के लिए आंख बंद कर लेते हैं. सबसे बड़ी बात सिस्टम कमजोर पड़े तो खेल और आसान
राजस्व को करोड़ों का नुकसान
खनिज कारोबार में फर्जी चालान का खेल तेजी से फैल रहा है. इसका मुख्य कारण रॉयल्टी और टैक्स की चोरी है, जहां कागजों में कम मात्रा दिखाकर या गलत दस्तावेज देकर भुगतान से बचा जाता है. ओवरलोडिंग के जरिए एक ही ट्रिप में ज्यादा मुनाफा कमाया जाता है, जबकि अवैध खनन को कागजों में वैध दिखाने के लिए फर्जी चालानों का सहारा लिया जाता है. एक ही चालान का बार-बार इस्तेमाल कर लागत घटाई जाती है और कमाई कई गुना बढ़ाई जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार, सिस्टम की कमजोरियों और जांच की कमी से यह खेल आसान हो जाता है. नतीजतन, सरकार को राजस्व नुकसान होता है और यह पूरा तंत्र एक संगठित अवैध कारोबार का रूप ले चुका है.
