गैस की कमी से स्कूलों में लकड़ी पर बना मध्याह्न भोजन
गैस की कमी से स्कूलों में लकड़ी पर बना मध्याह्न भोजन
By AWADHESH KUMAR | Updated at :
ठाकुरगंज के एक दर्जन विद्यालयों में सिलिंडर नहीं मिलने से रसोइयों को करनी पड़ी वैकल्पिक व्यवस्था
ठाकुरगंज. प्रखंड क्षेत्र के करीब एक दर्जन सरकारी विद्यालयों में शनिवार को रसोई गैस की किल्लत के कारण मध्याह्न भोजन लकड़ी जलाकर बनाना पड़ा. गैस सिलेंडर समय पर उपलब्ध नहीं होने से रसोइयों व विद्यालय प्रबंधन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. हालांकि बच्चों को भोजन से वंचित नहीं होने देने के लिए स्कूलों ने वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए लकड़ी से खाना तैयार कराया. जानकारी के अनुसार प्रखंड क्षेत्र के कई विद्यालयों में पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस की आपूर्ति बाधित है. इसके कारण मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में कठिनाई उत्पन्न हो रही है. शनिवार को स्थिति तब स्पष्ट हुई जब करीब एक दर्जन स्कूलों में गैस सिलेंडर नहीं होने के कारण रसोइयों को चूल्हा जलाकर लकड़ी से भोजन बनाना पड़ा. विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि गैस सिलेंडर की आपूर्ति में देरी के कारण ऐसी स्थिति बार-बार बन जाती है. गैस खत्म होने के बाद नया सिलेंडर समय पर नहीं मिलने से रसोइयों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है. कई स्कूलों में आसपास से लकड़ी जुटाकर किसी तरह बच्चों के लिए भोजन तैयार किया गया. रसोइयों का कहना है कि लकड़ी से भोजन बनाने में अधिक समय व मेहनत लगती है. साथ ही धुएं के कारण स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है. इसके बावजूद बच्चों के भोजन में बाधा न आए, इसलिए वे किसी तरह व्यवस्था कर भोजन तैयार करते हैं. इधर इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्याह्न भोजन योजना निदेशालय, बिहार ने भी तेल कंपनियों को निर्देश जारी किया है. निदेशक विनायक मिश्र द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों व आपूर्ति संबंधी समस्याओं के कारण एलपीजी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, जिससे स्कूलों में चल रही मध्याह्न भोजन योजना प्रभावित होने की आशंका है. पत्र में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम व भारत पेट्रोलियम के अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना के लिए एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाए. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (मध्याह्न भोजन) नूपुर प्रसाद ने भी बताया कि जिले के सभी गैस एजेंसी संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि स्कूलों में उपयोग होने वाली रसोई गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाए, ताकि बच्चों के भोजन में किसी प्रकार की बाधा न आए. अधिकारियों का कहना है कि मध्याह्न भोजन योजना सरकार की महत्वपूर्ण योजना है, जिसके तहत प्रतिदिन हजारों बच्चों को पौष्टिक भोजन दिया जाता है. इसलिए किसी भी परिस्थिति में इस योजना को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा. यदि किसी विद्यालय में गैस की कमी की शिकायत मिलती है तो संबंधित एजेंसी से समन्वय कर तुरंत समाधान कराया जाएगा.