किशनगंज में उफनती महानंदा के आगे बेबस दिखीं पुल निर्माण की संरचनाएं, बढ़ते जलस्तर से बढ़ी चिंता

Mahananda River Water Level:महानंदा नदी के बढ़ते जलस्तर ने नए पुल निर्माण की चिंता बढ़ा दी है. तेज बहाव के बीच पुल के नीचे लगी अस्थायी संरचनाएं पानी की चपेट में हैं और मानसून की शुरुआत में ही परियोजना की बड़ी परीक्षा शुरू हो गई है.

ठाकुरगंज (किशनगंज) से रिपोर्ट

Mahananda River Water Level : पहाड़ों और महानंदा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में हुई लगातार बारिश का असर अब किशनगंज जिले में दिखाई देने लगा है. ठाकुरगंज में महानंदा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से निर्माणाधीन नए पुल के आसपास का इलाका चर्चा का विषय बन गया है. तेज बहाव के बीच पुल निर्माण के लिए लगाए गए लोहे के पाइप, भारा (स्कैफोल्डिंग) और अन्य अस्थायी संरचनाएं पानी के दबाव का सामना करती नजर आ रही हैं.

महानंदा की उफनती धारा ने मानसून की शुरुआत में ही अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है. नदी के बढ़ते जलस्तर को देखकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ निर्माण एजेंसी की चिंता भी बढ़ गई है. लोगों का कहना है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो निर्माण कार्य की गति प्रभावित हो सकती है.

बरसात की पहली बड़ी परीक्षा से गुजर रहा पुल निर्माण

किशनगंज-तैयबपुर-ठाकुरगंज-गलगलिया (केटीटीजी) सड़क मार्ग पर स्थित 111 वर्ष पुराने ऐतिहासिक पुल के स्थान पर नए आरसीसी पुल का निर्माण कराया जा रहा है. यह परियोजना सीमांचल क्षेत्र की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा के बाद शुरू हुई इस परियोजना को 61 करोड़ 81 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिली है. पुल निर्माण पूरा होने के बाद ठाकुरगंज, गलगलिया और आसपास के इलाकों के लाखों लोगों को बेहतर और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद है.

Mahananda River Water Level: बढ़ता जलस्तर बना नई चुनौती

मानसून के शुरुआती दौर में ही महानंदा नदी के जलस्तर में आई तेजी ने निर्माण कार्य के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. पुल के नीचे लगी अस्थायी संरचनाएं तेज बहाव की चपेट में दिखाई दे रही हैं. हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन नदी का बढ़ता दबाव निर्माण एजेंसी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि महानंदा नदी बरसात के मौसम में अक्सर विकराल रूप धारण कर लेती है. ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतना जरूरी है ताकि परियोजना की गुणवत्ता और सुरक्षा पर कोई असर न पड़े.

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सीमांचल की लाइफलाइन है यह परियोजना

नया पुल केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि सीमांचल क्षेत्र की यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है. वर्षों पुराने पुल की जगह बन रहा यह आधुनिक आरसीसी पुल क्षेत्र के विकास और संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती देगा.

फिलहाल महानंदा नदी की उफनती धारा और निर्माणाधीन पुल का दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मानसून की इस पहली बड़ी परीक्षा के बीच निर्माण कार्य किस तरह आगे बढ़ता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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