किशनगंज में सरकारी बस का सपना कब होगा पूरा? सीमांचल के इस बड़े प्रखंड की वर्षों पुरानी मांग अब भी अधूरी

Kishanganj News: नेपाल और बंगाल की सीमा से सटे ठाकुरगंज से हर दिन हजारों लोग सफर करते हैं. लेकिन आज भी यहां नियमित सरकारी बस सेवा नहीं है. आखिर सीमांचल के इस महत्वपूर्ण इलाके को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा कब मिलेगी?

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Kishanganj News: सीमांचल का प्रवेश द्वार कहलाने वाला ठाकुरगंज आज भी एक ऐसी बुनियादी सुविधा की प्रतीक्षा कर रहा है, जो देश के अधिकांश शहरों और कस्बों में सामान्य मानी जाती है. नेपाल और पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे इस महत्वपूर्ण प्रखंड से रोजाना हजारों लोग शिक्षा, रोजगार, व्यापार और इलाज के लिए विभिन्न शहरों की ओर जाते हैं. इसके बावजूद यहां नियमित सरकारी बस सेवा का अभाव बना हुआ है. नतीजतन लोगों को निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे समय और पैसे दोनों का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ता है.

कभी सरकारी बसों से गुलजार रहता था ठाकुरगंज

स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि एक समय ठाकुरगंज से सिलीगुड़ी के बीच पश्चिम बंगाल सरकार की बस सेवा संचालित होती थी. उस दौर में यात्रियों को सुरक्षित, सस्ती और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प मिलता था. सरकारी बसों के कारण छात्रों, व्यापारियों और आम यात्रियों को काफी राहत मिलती थी. लेकिन समय के साथ यह सेवा बंद हो गई और फिर कभी बहाल नहीं हो सकी.

आज नई पीढ़ी के लिए सरकारी बस सेवा एक याद बनकर रह गई है. कई लोगों का मानना है कि यदि वह सेवा जारी रहती तो क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलती.

निजी वाहनों पर निर्भर हैं हजारों यात्री

वर्तमान में ठाकुरगंज से किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, सिलीगुड़ी और पटना जाने वाले अधिकांश यात्री निजी बसों, ऑटो, मैजिक और अन्य निजी साधनों का सहारा लेते हैं. इससे यात्रा महंगी होने के साथ-साथ असुविधाजनक भी हो जाती है.

सबसे अधिक परेशानी छात्रों, महिलाओं, बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को होती है. कई बार मरीजों को समय पर वाहन नहीं मिलने से गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है. वहीं नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को भी नियमित रूप से अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ता है.

सीमावर्ती क्षेत्र होने के बावजूद सुविधाओं का अभाव

ठाकुरगंज केवल एक प्रखंड मुख्यालय नहीं, बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क क्षेत्र है. गलगलिया जैसे अंतरराज्यीय व्यापारिक केंद्र इसकी आर्थिक अहमियत को और बढ़ाते हैं. इसके बावजूद परिवहन सुविधाओं की स्थिति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. लेकिन वर्षों से यह मांग केवल आश्वासनों तक सीमित है.

लोगों की मांग, शुरू हो नियमित सरकारी बस सेवा

क्षेत्रवासियों का मानना है कि ठाकुरगंज से किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, सिलीगुड़ी और पटना के लिए नियमित सरकारी बस सेवा शुरू होने से लाखों लोगों को राहत मिलेगी. इससे न केवल यात्रियों का खर्च कम होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.

आज भी ठाकुरगंज के लोग उसी सवाल का जवाब तलाश रहे हैं कि आखिर इतने महत्वपूर्ण क्षेत्र को सरकारी परिवहन व्यवस्था से कब जोड़ा जाएगा. लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में उनकी यह वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी और बस स्टैंड पर फिर से सरकारी बसों की आवाजाही दिखाई देगी.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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