ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Katihar Rail Division: कटिहार रेल मंडल के विभिन्न रेल खंडों पर चल रहे तकनीकी आधुनिकीकरण, ट्रैक ब्लॉक और परिचालन संबंधी सुधार कार्यों का सीधा खामियाजा आम रेल यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है. शुक्रवार को सीमांचल और उत्तर बंगाल को जोड़ने वाली कई लाइफलाइन मानी जाने वाली पैसेंजर और इंटरसिटी ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह ठप रहा. ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही अपनी ट्रेनों का इंतजार कर रहे यात्रियों को जब अचानक ट्रेन रद्द होने की सूचना मिली, तो स्टेशन परिसर में रेल प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी और अफरा-तफरी का माहौल देखा गया. पूर्व सूचना प्रणाली के कमजोर होने के कारण नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और मरीजों को बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा या भारी-भरकम किराया देकर निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा.
सिलिगुड़ी-कटिहार डेमू और जोगबनी इंटरसिटी सहित ये ट्रेनें रहीं पूरी तरह रद्द
रेलवे नियंत्रण कक्ष और ठाकुरगंज स्टेशन मास्टर कार्यालय से प्राप्त आधिकारिक सूची के अनुसार, विकास कार्यों के चलते निम्नलिखित मुख्य ट्रेनों का परिचालन अस्थाई रूप से बंद कर दिया गया है:
- सिलिगुड़ी–कटिहार डेमू पैसेंजर: ट्रेन संख्या 75744 / 75743 (अप और डाउन) दोनों दिशाओं में रद्द रही, जो स्थानीय छोटे व्यापारियों और दैनिक यात्रियों की मुख्य लाइफलाइन है.
- कटिहार इंटरसिटी एक्सप्रेस: ट्रेन संख्या 15719 / 15720 का परिचालन बंद रहने से कटिहार और एनजेपी (NJP) के बीच का सीधा संपर्क प्रभावित हुआ.
- जोगबनी इंटरसिटी एक्सप्रेस: भारत-नेपाल सीमा को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण ट्रेन संख्या 15724 / 15723 भी पटरी पर नहीं दौड़ी.
- मालदा कोर्ट–सिलिगुड़ी डेमू: इसके अलावा ट्रेन संख्या 75719 / 75720 का परिचालन ठप रहने से मालदा और सिलीगुड़ी सेक्शन के यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ी.
नौकरी, शिक्षा और इलाज के लिए जाने वाले फंसे; निजी वाहनों ने वसूला मनमाना किराया
ठाकुरगंज, तैयाबपुर, पोठिया, अलुआबाड़ी रोड, पंजीपाड़ा और किशनगंज जैसे ग्रामीण व अर्ध-शहरी स्टेशनों के बीच प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग सरकारी कार्यालयों, कोर्ट-कचहरी, कॉलेजों और अस्पतालों के लिए सफर करते हैं. मुख्य कड़ियों के अनुसार यात्रियों पर इसका सीधा असर देखा गया:
- आर्थिक और समय का नुकसान: अचानक ट्रेनें रद्द होने के कारण यात्रियों को विवश होकर स्थानीय बस स्टैंड और ऑटो स्टैंड का रुख करना पड़ा. लंबी दूरी की यात्रा के लिए निजी बस ऑपरेटरों और टैक्सियों ने यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए दो से तीन गुना तक मनमाना किराया वसूला.
- मेडिकल इमरजेंसी में दिक्कत: सबसे खराब स्थिति उन मरीजों की रही, जिन्हें इलाज के लिए कटिहार मेडिकल कॉलेज या सिलीगुड़ी के बड़े अस्पतालों में जाना था. ट्रेनों के अभाव में कई गंभीर मरीज ठाकुरगंज स्टेशन पर ही असहाय बैठे नजर आए.
“विकास जरूरी, पर मजबूत हो पूर्व सूचना प्रणाली”: आक्रोशित यात्रियों ने की मांग
रेलवे की विफलता: बुनियादी ढांचे का विकास बेहद सराहनीय कदम है, लेकिन बिना पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था और बिना किसी पूर्व डिजिटल नोटिफिकेशन के अचानक आधा दर्जन ट्रेनों को रद्द कर देना रेल प्रबंधन की लाचारी को दर्शाता है.
ठाकुरगंज स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने रेल प्रशासन के प्रति कड़ा रोष व्यक्त करते हुए मांग की है कि जब तक कटिहार रेल मंडल में मेगा ब्लॉक या मेंटेनेंस का काम जारी रहता है, तब तक रेलवे को प्रभावित रूटों पर पूरक (सप्लीमेंट्री) स्पेशल बसें चलानी चाहिए. इसके साथ ही, स्थानीय समाचार पत्रों और सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से कम से कम 24 घंटे पहले ट्रेनों के कैंसिलेशन की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि लोग अपने घरों से अनावश्यक रूप से स्टेशन न पहुंचें और आर्थिक व मानसिक प्रताड़ना से बच सकें.
