वाराणसी-सिलीगुड़ी रेल कॉरिडोर व गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे बनेंगे विकास की नयी लाइफलाइन
ठाकुरगंज. केंद्र सरकार द्वारा पेश वित्तीय वर्ष 2026-27 के आम बजट ने बिहार, विशेषकर सीमांचल के लोगों की उम्मीदों को नयी उड़ान दी है. बुनियादी ढांचे व दीर्घकालिक विकास योजनाओं के लिए की गयी भारी-भरकम राशि की घोषणा से इस पिछड़े इलाके में रोजगार और तरक्की की नयी सुगबुगाहट शुरू हो गयी है. एक्सप्रेसवे व हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जैसी मेगा परियोजनाओं से सीमांचल का नक्शा पूरी तरह बदलने वाला है.एक्सप्रेसवे के बाद अब हाई-स्पीड रेल का तोहफा
सीमांचल के लिए दो बड़ी परियोजनाएं गेम-चेंजर साबित होने वाली हैं.गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे :
520 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन कॉरिडोर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को सीधे जोड़ेगा. 37,500 करोड़ रुपये की इस परियोजना से गोरखपुर से सिलीगुड़ी की यात्रा का समय 15 घंटे से घटकर मात्र 6-8 घंटे रह जाएगा.वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर:
दिल्ली-वाराणसी के बाद अब वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच बुलेट ट्रेन जैसी हाई-स्पीड रेल चलाने की तैयारी है. 300 किमी प्रति घंटा की रफ्तार वाली यह ट्रेन सीमांचल के सफर को बेहद सुगम बना देगी.पर्यटन और कारोबार को मिलेगा ”बूस्ट”
इन दोनों परियोजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद सीमांचल के व्यापारियों व पर्यटकों के लिए दिल्ली, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा और हरिद्वार जैसे शहरों तक पहुंचना आसान हो जाएगा. इससे न केवल स्थानीय कारोबार को नयी ऊर्जा मिलेगी, बल्कि पर्यटन क्षेत्र में भी भारी निवेश की संभावना बढ़ेगी.जमीन की कीमतों में आएगा उछाल
वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जिन जिलों से होकर गुजरेगा, वहां विकास की रफ्तार के साथ जमीन के दामों में भी भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है. पटना, बक्सर, आरा, कटिहार और किशनगंज जैसे जिलों में इस कॉरिडोर के आने से रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी आएगी.विशेषज्ञों की राय:
रियल एस्टेट जानकारों का मानना है कि हाई-स्पीड रेल के आने से प्रस्तावित रूट के आसपास की जमीनों के रेट में 20 प्रतिशत से अधिक का उछाल आना तय है. जमीन की कीमत इस बात पर भी निर्भर करेगी कि उस स्थान की सड़क कनेक्टिविटी कैसी है.2028 तक पूरा करने का लक्ष्य
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को 2028 तक पूरा करने की योजना है. यह परियोजना सीमांचल को सीधे देश की राजधानी दिल्ली से (यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ व लखनऊ-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के माध्यम से) जोड़ देगी, जिससे यह क्षेत्र उत्तर भारत के बड़े व्यापारिक केंद्रों से सीधे जुड़ जाएगा.
