मुख्य बातें:
किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट
Guru Arjan Dev Ji Shaheedi Diwas: बिहार के सीमांचल प्रक्षेत्र अंतर्गत किशनगंज जिले में सिख समुदाय द्वारा मानवता, परोपकार और सेवा का मर्मस्पर्शी संदेश दिया गया है. सिख धर्म के पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जन देव जी के शहीदी दिवस के पावन अवसर पर गुरुवार को पूरा प्रक्षेत्र गुरु की भक्ति और सेवा भाव में लीन नजर आया. इस विधिक स्मृति में जहां शहर के महावीर मार्ग स्थित मुख्य गुरुद्वारा साहिब में विशेष दीवान सजाकर अरदास और शबद-कीर्तन संधारित किया गया, वहीं कड़कड़ाती धूप में तपने वाले कली-मजदूरों और राहगीरों को राहत देने के लिए युवाओं ने सड़कों पर कमान संभाली.
कैलटैक्स चौक पर सजी ‘छबील सेवा’; ठंडे-मीठे शरबत से राहगीरों की बुझाई प्यास
इस धार्मिक आयोजन और संगत की मुस्तैदी की मुख्य कड़ियां बेहद भावुक और सुचारू रहीं. शहर के व्यस्ततम कैलटैक्स चौक पर सुबह से ही कनिष्ठ व वरिष्ठ सिख युवाओं की टोली बर्तनों में बर्फ और मीठा शरबत तैयार करने में जुटी रही.
सरदार बलदेव सिंह और सरदार गगनदीप सिंह ने बताया कि सिख इतिहास में ‘छबील’ का विधिक महत्व बेहद खास है. इसका मुख्य अर्थ सुदूर राहगीरों और आम जनमानस को भीषण गर्मी के मौसम में ठंडा व मीठा पेय पदार्थ निःशुल्क वितरित करना है. गुरु अर्जन देव जी ने सत्य और धर्म की रक्षा के लिए जलती हुई तवे पर बैठकर जो शहादत दी थी, यह सेवा उसी ठंडे और शांत स्वभाव से समाज को प्रेम का संदेश देने की एक कमान है.
गुरुद्वारा प्रबंधन और युवाओं ने मिलकर संभाली कमान; लगा रहा तांता
“गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के कप्तानों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने बताया कि इस सेवा का मुख्य उद्देश्य केवल प्यास बुझाना नहीं, बल्कि गुरु साहिब द्वारा बताए गए निष्काम सेवा के विधिक मार्ग को धरातल पर मुस्तैद करना है. सुबह से लेकर देर दोपहर तक ऑटो चालकों, रिक्शा वालों, कली-मजदूरों और स्कूली बच्चों को रोक-रोक कर आदर सहित शरबत पिलाया गया, जिससे आम जनता को इस भीषण विसंगतिपूर्ण मौसम में बड़ी राहत मिली.”
Guru Arjan Dev Ji Shaheedi Diwas: समाज के सभी वर्गों ने मिलकर टेका माथा; याद किया गुरु का बलिदान
इस पुनीत कार्य को सुचारू रूप से संधारित करने के लिए मालक सिंह सलूजा, इंद्रदीप सिंह, रोशन बवेजा, परमजीत सिंह, राकेश गुप्ता, राहुल डोगरा, अंकुश गुप्ता, डॉ. सरकार और बिट्टू सिंह सहित प्रक्षेत्र के तमाम सामाजिक कार्यकर्ता और कनिष्ठ युवा पूरे उत्साह के साथ मुस्तैद रहे.
स्थानीय राहगीरों और प्रबुद्ध नागरिकों ने सिख समाज की इस मानवीय कड़ियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की है. लोगों का कहना है कि मजहबी दीवारों को तोड़कर जिस तरह से यहाँ समाज के हर वर्ग के लिए ठंडे पानी और शरबत की लाइव व्यवस्था की गई, वह सीमांचल की साझा संस्कृति और आपसी भाईचारे की जड़ों को और अधिक विधिक मजबूती प्रदान करती है.
