किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट
Emergency 1975 Nagraj Nakhat: देश में आपातकाल लागू होने के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गुरुवार को ठाकुरगंज स्थित जैन एग्रो फार्म्स एंड नर्सरी (ड्रैगन फ्रूट फार्म) में भाजपा कार्यकर्ताओं ने जेपी आंदोलन के सेनानी एवं लोकतंत्र रक्षक नागराज नखत को अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि स्वरूप सम्मान अर्पित किया.
कार्यक्रम में उपस्थित भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था. उस दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और हजारों लोकतंत्र समर्थकों को बिना मुकदमे के जेलों में बंद कर दिया गया. ऐसे कठिन समय में नागराज नखत जैसे लोकतंत्र सेनानियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया, जिसका देश हमेशा ऋणी रहेगा.
आपातकाल की यादें साझा कीं
सम्मान प्राप्त करने के बाद नागराज नखत ने आपातकाल के दिनों को याद करते हुए बताया कि 25 जून 1975 को आपातकाल लागू होने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय स्वयंसेवक होने के कारण पुलिस उनकी तलाश कर रही थी. इसी क्रम में ठाकुरगंज थाना कांड संख्या-3, दिनांक 4 अगस्त 1975 दर्ज किया गया.
उन्होंने बताया कि 6 जनवरी 1976 को उन्हें पोवाखाली एलआरपी चौक से गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी के बाद उन्हें डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स (DIR) के तहत बिना किसी मुकदमे के निरुद्ध कर दिया गया. लगभग 10 माह तक उन्हें किशनगंज, पूर्णिया, भागलपुर और हजारीबाग की विभिन्न जेलों में रखा गया. अंततः 4 नवंबर 1976 को भागलपुर केंद्रीय कारा से उनकी रिहाई हुई.
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र सेनानी नागराज नखत का संघर्ष और त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है. उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए व्यक्तिगत हितों की परवाह किए बिना संघर्ष किया. ऐसे सेनानियों का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा.
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने लोकतंत्र सेनानी नागराज नखत के योगदान को नमन करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
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