ठाकुरगंज: धंसी पुलिया पर विभागीय बैरियर बना आफत; बालू लदे ट्रकों के लिए अवैध डायवर्जन, पर स्कूल बसों को 20 किमी का चक्कर

ठाकुरगंज-मुरारीगछ पथ पर क्षतिग्रस्त पुलिया के बाद पथ निर्माण विभाग की व्यवस्था ग्रामीणों के लिए आफत बन गई है. भारी वाहनों के लिए अवैध डायवर्जन खुले हैं, जबकि स्कूली बच्चों को 20 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है.

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज-मुरारीगछ पथ पर जून माह में क्षतिग्रस्त हुई पुलिया के बाद पथ निर्माण विभाग द्वारा की गई अस्थायी व्यवस्था अब स्थानीय ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के लिए भारी मुसीबत का सबब बन गई है.

विभाग ने भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के नाम पर सड़क के तीन स्थानों पर बैरियर तो लगा दिए, लेकिन यात्रियों और स्कूल वाहनों के लिए सुगम वैकल्पिक डायवर्जन बनाना भूल गया. विडंबना यह है कि मानिकपुर के समीप बने अवैध डायवर्जन से धड़ल्ले से बालू लदे भारी ट्रक निकल रहे हैं, जबकि स्कूली बच्चों से भरी बसों को 20 किलोमीटर का लंबा फेरा लगाने पर मजबूर होना पड़ रहा है.

जून में धंसी 60 साल पुरानी पुलिया, स्थायी मरम्मत अब भी अधर में

पथ निर्माण विभाग के 10 जुलाई 2026 के आधिकारिक पत्र के अनुसार, ठाकुरगंज-मुरारीगछ मार्ग में कुल 21 छोटी-बड़ी पुलिया हैं, जिनमें से अधिकांश 60 वर्ष से भी अधिक पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं.

अत्यधिक भारी वाहनों के परिचालन के कारण मार्ग के 11वें किलोमीटर स्थित पुलिया धंस गई थी. इसके बाद विभाग ने चेतावनी बोर्ड लगाते हुए 14/1, 11/1 एवं 4/1 किलोमीटर पर बैरियर खड़े कर दिए और गिट्टी-बालू लदे भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने का दावा किया. हालांकि, तीन माह बीत जाने के बावजूद क्षतिग्रस्त पुलिया के पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.

विभागीय लापरवाही का दोहरा मापदंड: ट्रक पास, बसें फेल

मौके की जमीनी हकीकत प्रशासनिक व्यवस्था के दोहरे रवैये की पोल खोल रही है:

  • ट्रकों के लिए खुली छूट: स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मानिकपुर के समीप बैरियर के बगल से एक अवैध कच्चा डायवर्जन बना दिया गया है. इस रास्ते से रात-दिन ओवरलोडेड बालू व गिट्टी लदे ट्रक आसानी से गुजर रहे हैं.
  • स्कूली बच्चों पर दोहरी मार: बाकी दो स्थानों पर बैरियर तो लगा दिए गए, लेकिन कोई डायवर्जन नहीं बनाया गया. इसके चलते एंबुलेंस, सामान्य यात्री वाहन और विशेषकर स्कूल बसों का सीधा मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है.

20 किमी का फेरा, महानंदा पुल पर जाम से 2 घंटे की देरी

मुरालीगच्छ (विधाननगर) क्षेत्र के सैकड़ों बच्चे ठाकुरगंज नगर के विभिन्न निजी व सरकारी विद्यालयों में अध्ययन करते हैं.

सीधा मार्ग बंद होने के कारण अब स्कूल बसों को सोनापुर-तैयबपुर होकर करीब 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है. बरसात के मौसम में महानंदा नदी के पुल पर लगने वाले जाम के कारण बच्चे स्कूल से घर लौटने में रोजाना दो से ढाई घंटे लेट हो रहे हैं. थके-हारे बच्चों की सेहत और सुरक्षा को लेकर अभिभावक बेहद चिंतित और आक्रोशित हैं.

विभाग खुद मान रहा अवैध डायवर्जन, पर कार्रवाई सिफर

चौंकाने वाली बात यह है कि पथ निर्माण विभाग ने 10 जुलाई को लिखे पत्र में खुद माना था कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त पुलिया के पास बिना अनुमति के अवैध डायवर्जन बनाकर भारी वाहनों को पार कराया जा रहा है.

विभाग ने डीएम और एसडीएम किशनगंज से इस पर रोक लगाने और कार्रवाई करने की गुहार भी लगाई थी. इसके बावजूद अवैध रूप से भारी वाहन बेधड़क निकल रहे हैं और खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है. स्थानीय जनता ने प्रशासन से दो टूक सवाल किया है कि जब पुलिया असुरक्षित है तो ट्रकों का परिचालन क्यों नहीं रुका, और अगर मार्ग बंद करना ही था तो स्कूली बसों के लिए वैधानिक डायवर्जन क्यों नहीं बनाया गया?

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लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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