मशरूम की खेती से आत्मनिर्भर बनेंगे सीमावर्ती ग्रामीण

मशरूम की खेती से आत्मनिर्भर बनेंगे सीमावर्ती ग्रामीण

वाइब्रेंट विलेज तुलसिया में प्रशिक्षण शिविर का हुआ समापन. 25 प्रशिक्षुओं को मिले प्रमाण पत्र और बीज

दिघलबैंक. भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा में तैनात एसएसबी अब सीमावर्ती क्षेत्रों में खुशहाली व आत्मनिर्भरता की नयी इबारत लिख रही है. सोमवार को 12वीं वाहिनी एसएसबी की बी कंपनी द्वारा जीवंत गांव (वाइब्रेंट विलेज) तुलसिया में आयोजित मशरूम खेती के व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ. इस पहल का उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर युवाओं और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है.

रोजगार सृजन का बनेगा सशक्त माध्यम

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उप कमांडेंट नरेन्द्र सोपान कुटे ने सफल प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र व मशरूम बीज किट प्रदान किए. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती कम लागत में अधिक मुनाफे वाला सौदा है. यह प्रशिक्षण ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का सशक्त माध्यम साबित होगा. उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक पद्धति से की जाने वाली यह खेती स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी.

18 दिनों तक मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 10 जनवरी से शुरू होकर 27 जनवरी 2026 तक चला. शिविर के दौरान 25 चयनित ग्रामीणों को वैज्ञानिक विधि से मशरूम उत्पादन, फसल का रख-रखाव और उसके विपणन (मार्केटिंग) की बारीकियों से अवगत कराया गया. प्रशिक्षण में देशबंधु व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, सिलीगुड़ी की सचिव अर्पिता बरुआ, निदेशक गौर सुंदर हलदार तथा प्रशिक्षक देव नारायण महतो ने महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां साझा कीं.

एसएसबी की पहल को ग्रामीणों ने सराहा

समापन समारोह के अवसर पर बी कंपनी दिघलबैंक के कंपनी कमांडर सहायक कमांडेंट प्रियरंजन चकमा सहित कई एसएसबी जवान उपस्थित रहे. स्थानीय लोगों ने सीमा सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक उत्थान और कौशल विकास की दिशा में एसएसबी द्वारा किए जा रहे प्रयासों की खुले मन से प्रशंसा की. ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से सीमावर्ती क्षेत्रों में पलायन रुकेगा और लोग स्वरोजगार की ओर प्रेरित होंगे.

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Author: AWADHESH KUMAR

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