किशनगंज में 'अर्थ गंगा' पहल के तहत जैविक व प्राकृतिक खेती कार्यशाला: रासायनिक खादों के खिलाफ जुटे 100 से अधिक किसान, सीखे ब्रह्मास्त्र और जीवामृत बनाने के गुर

किशनगंज जिला मुख्यालय स्थित संयुक्त कृषि भवन के सभागार में गुरुवार को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तत्वावधान में 'अर्थ गंगा' पहल के अंतर्गत एक दिवसीय "जैविक एवं प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यशाला" का सफल आयोजन किया गया. इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, मिट्टी की सेहत सुधारने और किसानों को रासायनिक खादों के चक्रव्यूह से निकालकर सतत कृषि प्रणाली से जोड़ना था.

रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों पर चिंता, 100 से अधिक किसानों ने लिया प्रशिक्षण

आज के दौर में रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से न केवल जमीन बंजर हो रही है, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी इसका बेहद बुरा असर पड़ रहा है. इसी गंभीर मुद्दे पर किसानों को जागरूक करने के लिए जिला कृषि कार्यालय के सभागार में इस विशेष शिविर का आयोजन किया गया. कार्यशाला में जिले के विभिन्न प्रखंडों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आए 100 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया. कृषि विशेषज्ञों ने उपस्थित किसानों को प्राकृतिक खेती आधारित उन्नत व वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की व्यावहारिक तकनीकी जानकारी दी.

कम लागत में बंपर पैदावार: बीजामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र बनाने की सिखाई गई विधि

प्रशिक्षण सत्र के दौरान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को कम लागत में अधिक और शुद्ध पैदावार लेने के कई अचूक घरेलू नुस्खे और वैज्ञानिक तौर-तरीके सिखाए गए, जो इस प्रकार हैं:

  • जैविक घोलों का निर्माण: किसानों को घर पर ही बेहद कम लागत में जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे अत्यंत प्रभावी जैविक घोल और कीटनाशक तैयार करने एवं फसलों में उनके सही उपयोग की लाइव जानकारी दी गई.
  • मृदा व जल संरक्षण: मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखने, फसल अवशेष प्रबंधन (पराली न जलाने), जैव विविधता के संरक्षण और जल संचयन की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई.
  • लागत में कमी: विशेषज्ञों ने बताया कि बाजार से महंगे खाद-बीज खरीदने के बजाय प्राकृतिक खेती के मॉडल को अपनाकर कृषि लागत को शून्य या न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकता है, जिससे सीधे तौर पर किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि होगी.

प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने का आह्वान, कई नामचीन कृषि वैज्ञानिक रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कृषि पदाधिकारी (DAO) द्वारा की गई. इस अवसर पर मंच पर नमामि गंगे किशनगंज के जिला परियोजना पदाधिकारी मंसूर आलम, कृषि सहायक निदेशक (शस्य), कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ. अलीमुल इस्लाम और प्रखंड कृषि पदाधिकारी (जैविक) शाहनूर आलम सहित कृषि विभाग के कई अन्य आला अधिकारी और तकनीकी कर्मी मुख्य रूप से उपस्थित रहे. उपस्थित अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से किसानों से अपील करते हुए कहा कि जैविक और प्राकृतिक कृषि प्रणाली को अब एक जनआंदोलन के रूप में अपनाने की जरूरत है. यह तकनीक न केवल हमारी आने वाली पीढ़ियों और पर्यावरण को बचाएगी, बल्कि जल स्रोतों की शुद्धता और दीर्घकालीन कृषि स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी.

किसानों ने सराहा, भविष्य में भी ऐसे तकनीकी सत्र आयोजित करने की मांग

सत्र के समापन पर प्रशिक्षण में शामिल हुए किसानों ने इस कार्यशाला को अपने जीवन और खेती के लिए अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक और व्यावहारिक बताया. किसानों ने कहा कि इस प्रकार के व्यावहारिक प्रशिक्षण से उनका हौसला बढ़ा है और वे अब रासायनिक खेती को धीरे-धीरे छोड़कर जैविक खेती की ओर रुख करेंगे. किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि भविष्य में भी पंचायत और प्रखंड स्तर पर ऐसे व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएं ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें.

किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट:

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >