संस्कृति व अधिकारों की रक्षा के लिए 400 लोगों का जत्था दिल्ली रवाना

संस्कृति व अधिकारों की रक्षा के लिए 400 लोगों का जत्था दिल्ली रवाना

पारंपरिक वेशभूषा में गांधी चौक से निकले लोग, धर्मांतरित व्यक्तियों को एसटी सूची से हटाने व कड़े कानून की मांग बुलंद की

किशनगंज. जिले से जनजातीय संस्कृति, परंपरा व अधिकारों की रक्षा को लेकर एक बड़ा जत्था आज दिल्ली के लिए रवाना हुआ. वनवासी कल्याण आश्रम और संचालन समिति के सदस्यों के संयुक्त तत्वावधान व प्रबंधन में आयोजित इस ”जनजाति गर्जना रैली” में शामिल होने के लिए समुदाय के लोगों में भारी उत्साह देखा गया. जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले 400 से अधिक जनजातीय समुदाय के लोग शहर के गांधी चौक पर एकत्रित हुए. वहां से वे अपनी पारंपरिक वेशभूषा, पूरे उत्साह और जोश के साथ दिल्ली के लिए निकले.

रामलीला मैदान में दिखेगी एकजुटता

यह जत्था आगामी 24 मई को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित होने वाले ”जनजातीय सांस्कृतिक समागम” में हिस्सा लेगा. इस समागम में देश भर के विभिन्न राज्यों से जनजातीय समुदाय के लोग शामिल हो रहे हैं. वनवासी कल्याण आश्रम के जिला सचिव गौतम पोद्दार ने बताया कि इस जनजाति सांस्कृतिक समागम को लेकर जिले भर के जनजातीय समाज में भारी उत्साह है. इस समागम के माध्यम से जनजातीय समाज अपनी संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज और अधिकारों के संरक्षण को लेकर देशव्यापी एकजुटता प्रदर्शित करेगा. उन्होंने कहा कि यह पूरा आयोजन जनजाति समाज को उनका असली हक व न्याय दिलाने और समाज का मान बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है.

प्रमुख मांगें व मुद्दे

जनजाति समाज से जुड़े लोगों ने बताया कि उनकी सबसे प्रमुख मांग संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन करने की है. इसके तहत धर्मांतरित व्यक्तियों (धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों) को एसटी की सूची से बाहर करने के लिए संसद में विधेयक लाया जाए. आरक्षण एवं सुरक्षा के अधिकार के तहत मांग उठाई गई है कि धर्मांतरित व्यक्तियों को एसटी प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लड़ने और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने से रोका जाए. संगठन ने देश में धर्मांतरण पर पूरी तरह रोक लगाने तथा जनजातीय धर्म, संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं को संरक्षित करने के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की है.

जनजातीय रंग में रंगा नजर आया गांधी चौक

प्रस्थान के समय बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय के लोग अपने पारंपरिक परिधानों व सांस्कृतिक पहचान (पारंपरिक वाद्य यंत्रों और प्रतीकों) के साथ मौजूद रहे. इसके चलते गांधी चौक का पूरा माहौल जनजातीय संस्कृति के खूबसूरत रंग में रंगा नजर आया. इस मौके पर मुख्य रूप से गौतम पोद्दार, राकेश जैन, राजीव केसरी, गौतम मजूमदार, बुधराई, छोटू, नारायण हेंब्रम, शिवलाल हसदा, जिला संगठन मंत्री दुर्गा उराव, मुकेश हेमराम, विकास सोरेन, सुंदरलाल सिंह, मंगनी हेंब्रम, संजय मरांडी, नागिन उराव सहित समाज के कई अन्य गणमान्य लोग और कार्यकर्ता उपस्थित थे.

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लेखक के बारे में

Author: AWADHESH KUMAR

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