नाबालिग के साथ दुष्कर्म की घटना में पुलिस पर भेदभाव का लगाया आरोप
आदिवासियों के थाना पहुंचने पर सतर्क हुई पुलिस, टली घटना
किशनगंज : पोठिया थाना में अगलगी की घटना अभी शांत भी नहीं हुई थी कि रविवार को दिघलबैंक में एक बड़ा मामला पुलिस की सतर्कता से टल गया. ग्रामीणों की भीड़ थाना की ओर पहुंचते देख आसपास की थानों की पुलिस को बुला लिया गया. इसके बाद एसडीओ ने ग्रामीणों से बात कर मामले को शांत कराया. जानकारी के अनुसार जिले के दिघलबैंक थाना क्षेत्र के मालटोली आदिवासी टोला गांव की महिला के साथ दुष्कर्म एवं अठगड़ा बस्ती गांव की मासूम बच्ची के साथ मक्के की खेत में दुष्कर्म मामले ने तूल पकड़ लिया. रविवार को दुष्कर्म पीड़िता के पिता के अलावे बच्ची को बचाने वालों निर्दोष ग्रामीणों के खिलाफ आरोपित के परिजन द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराने का मामला आया.
इसके बाद एक आवेदन थाना को सौंपने के उद्देश्य से शनिवार को थाना से महज कुछ ही दूरी पर लोग इकट्ठा होने लगे. इसकी भनक दिघलैंक थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार को लगते ही उन्होंने बाहर से पुलिस फोर्स मंगवा लिया. किशनगंज से एसडीपीओ कामनी वाला, पुलिस फोर्स के साथ दिघलबैंक थाना आ पहुंची़ वहीं बहादुरगंज, गंधर्वडांगा, कोढ़ोबाड़ी से पुलिस बल आ पहुंचे़ कोई अप्रिय घटना न घटे इसके लिए प्रशासन पूरी तरीके से मुस्तैद दिखी. थोड़ी देर बाद एसडीपीओ कामिनी वाला बाहर जमे लोगों से बात करने के लिए पहुंची. ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठाये़ साथ ही दिघलबैंक थाना प्रभारी, एसआई वेदानंद एवं मनीर आलम व्यक्ति पर कई गंभीर आरोप लगाये़ इस संबंध में लालचंद्र ऋषिदेव ने एक आवेदन भी सौंपा तथा वरीय पदाधिकारी से जांच की मांग की़ वहीं पीड़ित आदिवासी महिला ने भी आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी है़ पीड़ित महिला ने अपने आवेदन में लिखा है कि पांच दिन पूर्व छह फरवरी की शाम दिघलबैंक हटिया से घर लौट रही थी तो रास्ते में बैरबन्ना गांव के बांसझाड़ के पास मनीर आलम जो बैरबन्ना निवासी है, उसने मेरे साथ दुष्कर्म किया़ हल्ला करने पर जान से मारने की धमकी दी और मुंह बंद रखने को कहा़ एसडीपीओ ने ग्रामीणों से सारी बातों की जानकारी ली. इसके बाद उचित कार्रवाई का भरोसा दिया.
