साल 2011 में प्रारम्भ हुए इस पूल को 2014 में ही पूरा हो जाना चाहिए था
किशनगंज : तकनीक के क्षेत्र में तरक्की कर जहां देश और दुनियां चांद तक का सफर तय चुकी हैं.वहीं जिले के सबसे पिछड़े या यूं कहे प्रदेश के सबसे पिछड़े प्रखंडों में शुमार टेढ़ागाछ के लोग आज भी सीधे रास्ते से अपने जिला मुख्यालय नहीं पहुंच पाते है और देश को आज़ाद हुए सात दशक से अधिक का समय बीत चुका है. ये कहना है लौचा पुल निर्माण समिति के वशीकुर रहामन का. मंगलवार को एक शिष्टमंडल के साथ जिलापदाधिकारी से मिले और लौचा पुल का निर्माण कार्य में तेजी लाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा है कि साल 2011 में प्रारम्भ हुए इस पूल को साल 2014 में ही पूरा हो जाना चाहिए था.
लेकिन आज भी हालत जस की तस है.इन लोगों ने अपने आवेदन में कहा है कि पायलट चैनल के माध्यम से नदी की धारा को पूल के मध्य से मुख्यधारा निकाल कर एप्रोच बनाकर आवागमन बहाल किया जा सकता है जैसा की इसी नदी की धारा पर चरघरिया और बैसा में किया गया है.लेकिन पूल निर्माण करने वाली एजेंसी मां काली लिमिटेड द्वारा इस दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है लिहाजा स्थानीय लोगों को आंदोलन करने पर विवश किया जा रहा है.और इसी क्रम में 07 फरवरी को टेढ़ागाछ तथा 09 फरवरी को बहादुरगंज प्रखंड मुख्यालय में धरना दिया जायेगा.पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री बिहार और गृह मंत्री भारत सरकार को भी भेजी गयी है इस अवसर पर समिति के अन्य सदस्य मौजूद थे.
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