गुलाबबाग से करता था संचालन
गिरफ्तार पशु तस्कर सरगना मो रईस उर्फ बबलू कतिपय पदाधिकारियों के सहयोग से बिहार में बड़े पैमाने पर पशुओं की तस्करी को दे रहा था अंजाम. प्रत्येक रूट पर सूचना देने वाले उसे करते थे खतरे से अगाह. कतिपय पुलिस पदाधिकारी भी जान बूझकर मूंद लेते थे आंखे. कभी भी बड़ी मछली पकड़ी नहीं गयी सिर्फ चालक व खलासी ही चढ़े पुलिस के हत्थे.
किशनगंज : बिहार से होने वाली मवेशी तस्करी का गोरखधंधा रुwकने का नाम नहीं ले रहा है. किशनगंज में मवेशी तस्करी के एनएच 31 (किशनगंज होते हुए सिलीगुड़ी, असम)और एनएच 327ई (अररिया, जोकीहाट, बहादुरगंज-ठाकुरगंज, सिलीगुड़ी, असोम) गोल्डन रूट हैं. इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर मवेशी तस्करों को कोई भी टोका-टाकी नहीं करता है.
पुलिस की सक्रियता के बाद भी लगातार हो रही पशुओं की तस्करी व ओवरलोड वाहनों का परिचालन प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है. जिला पदाधिकारी पंकज दीक्षित के निर्देश पर पशु तस्करी व ओवरलोड ट्रकों के परिचालन पर सख्ती के बाद गत सोमवार की मध्य रात्रि को जिले के ठाकुरगंज प्रखंड के कुर्लीकोट थाना क्षेत्र चक्करमारी गांव के समीप सदर एसडीओ मो शफीक, डीटीओ मनीष कुमार और प्रवर्तन निरीक्षक मदन मोहन सिंह ने मवेशी तस्कर के सरगना मो रईस उर्फ बबलू सहित चार लोगों को धर दबोचा.
गिरफ्तार मवेशी तस्कर मो रईस ने बताया कि मवेशी को हरियाणा, सुपौल, यूपी के अलावे खगडि़यां, बनमनखी, मधेपुरा, सहरसा, कटिहार के खैरिया व मनसाही आदि मवेशी हाटों से पशुओं की खरीद कर उसकी तस्करी की जाती है. उन्होंने बताया कि दूसरे प्रदेश और बिहार के विभिन्न हाटों से खरीद कर गुलाबाग जीरो माइल के समीप अररिया रूट पर ‘अपना लाइन होटल’ पर मवेशियों की डंपिंग की जाती है. यहीं पर कन्टेनर और 12 चक्का वाले ट्रकों में पशुओं को लाद कर गंतव्य की ओर वाहनों को रवाना कर दिया जाता है. उन्होंने माना कि इस धंधे में कई पुलिस पदाधिकारी और सफेदपोश भी शामिल है.
उन्होंने कहा कि लाइन मिलने के बाद ही मवेशी से भरे वाहनों को सिलीगुड़ी, असोम भेजा जाता है. जहां से मवेशियों को बांग्लादेश भेज दिया जाता है. उन्होंने कहा कि गुलाबाग से पशुओं को लादकर कुछ वाहनों को अररिया, जोकीहाट होते हुए बहादुरगंज, पौआखाली, कुर्लीकोर्ट गलगलिया होते सिलीगुड़ी भेजा जाता है तो कई वाहन एनएच 31 डगरूआ, बायसी, डंगराहा, दालकोला, किशनगंज, पांजीपाड़ा होते हुए सिलीगुड़ी व असोम निकलते है. वाहनों को लाइनर की सूचना पर लेकर चालक निकलते हैं. लाइनर पुलिस के बारे में चालकों को पल-पल की सूचना देता है. जिसके आधार पर चालक सुरक्षित रास्ते से पशु लदे वाहनों को लेकर आराम से निकल जाते हैं. उन्होंने माना कि ट्रकों पर ले जाते मवेशी पकड़े जाते है
तो पुलिस भी मामूली कार्रवाई कर पल्ला झाड़ लेती है. क्योंकि पहले से ही पुलिस को सब कुछ पता होता है. ट्रक पहचानते ही पुलिस के कदम खुद-ब-खुद रूक जाते हैं. उन्होंने कई सनसनी खेज खुलासे करते हुए कहा कि कई बार मवेशी तस्करी होते हुए भी पकड़ी गई है और पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा है लेकिन बड़ों को नहीं बल्कि वाहन चालक और परिचालकों को. उन्होंने बताया कि मवेशी का डंपिंग जोन बिहार और बंगाल में भी है जहां मवेशी का स्टॉक किया जाता है.
एसडीओ की कार्रवाई से मवेशी तस्करों में हड़कंप : बिहार में मवेशी तस्करों का सरगना पूर्णियां जिले के गुलाबाग में बैठे हरियाणा, यूपी,बिहार और बंगाल के रास्ते बांग्लादेश प्रति दिन दर्जनों ट्रकों पर भर कर मवेशियों को भेजने का काम करता है. इसका मुख्य सरगना और मवेशी तस्करी के मामले में बिहार का डॉन कहे जाने वाला पूर्णियां जिले के गुलाबाग जीरो माइल निवासी मो रईस उर्फ बबलू के अन्य गुर्गर के साथ किशनगंज सदर एसडीओ मो शफीक और टीडीओ मनीष कुमार व प्रवर्तन पदाधिकारी मदन मोहन सिंह ने एक इंट्री माफिया के साथ धर दबोचा था. यहां बता दें कि किशनगंज सदर
एसडीओ ने वाद संख्या 152 एम/2016 में धारा 109 के तहत मो रईस उर्फ बबलू, मो अली आजम उर्फ करिया, मो अमजद तीनों गुलाबाग पूर्णियां एवं मो नाजीम हुसैन कुर्लीकुट ठाकुरगंज निवासी के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए बुधवार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है.
क्या कहते है एसडीओ
एसडीओ मो शफीक ने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देश पर ओवर लोडिंग, पशु तस्करी व इंट्री माफियाओं पर नजर रखी जा रही है. उनके द्वारा पशु तस्करी, ओवर लोडिंग वाहनों व इंट्री माफियाओं के विरूद्ध कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.
