बेलवा. जिले के गणित के महान शिक्षक एवं कई पीढ़ियों के मार्गदर्शक आदरणीय मास्टर मसूद साहब का देहांत रविवार को दिल्ली में इलाज के दौरान हो गया. उनकी मौत की खबर सुनते ही पूरे इलाके में मातम छा गया. उनके द्वारा पढ़ाये गये छात्रों एवं अभिभावकों में शेाक की लहर दौड़ गयी. मास्टर मसूद लगभग 1995 से किशनगंज जिले में गणित के विषय को पढ़ाना आरंम्भ किया था, उनका संपूर्ण जीवन बच्चों को पढ़ाने में गुजर गया. मास्टर मसूद साहब सिर्फ ब्लैकबोर्ड पर फॉर्मूले लिखने वाले शिक्षक नहीं थे, वे जीवन का गणित सिखाने वाले गुरु थे. उन्होंने कभी शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनाया, बल्कि उसे इबादत की तरह निभाया. जिन बच्चों के पास फीस नहीं होती थी, उनके लिए उनका दरवाजा हमेशा खुला रहा. वे हमेशा सुबह से देर रात तक बच्चों को शिक्षा देने का काम करते थे. उनके लिए शिक्षा देना कमाई का जरिया नहीं, सेवा का माध्यम था. गरीब, कमजोर, पिछड़े बच्चों को आगे बढ़ाना ही उनका मकसद था. गणित जैसा कठिन विषय भी उनकी जुबान से इतना आसान हो जाता था कि डरने वाला बच्चा भी टॉपर बन जाता था. क्लास में अनुशासन के पक्के, लेकिन दिल से बेहद नरम. हर छात्र को बेटे-बेटी जैसा मानते थे. उनके पढ़ाए हजारों छात्र आज डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, अफसर बनकर समाज की सेवा कर रहे हैं. यही उनकी असली कमाई थी. मास्टर मसूद साहब चले गए लेकिन उनके दिए हुए संस्कार, उनका पढ़ाया हुआ ज्ञान और उनका सेवा-भाव हजारों दिलों में जिंदा रहेगा. बेलवा ही नहीं बल्कि पूरे किशनगंज क्षेत्र एक सच्चे शिक्षक के जाने से सूना हो गया. उनका पार्थिव शरीर सोमवार दिल्ली से उनके निज निवास बेलवा, टेंगरमारी पहुंचा, जिन्हें देखने के लिए हजारों की संख्या में छात्र- छत्राएं एवं अभिभावक से लेकर जानने वालों की भीड़ लग गई. इनका अंतिम संस्कार बगल के ओद्रा कब्रिस्तान में सोमवार को कर दिया गया.
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