दुखद . सदर अस्पताल में प्रसूता की मौत, चिकित्सक पर लगाया लापरवाही का आरोप
किशनगंज : स्थानीय सदर अस्पताल में मंगलवार की देर रात्रि सुरक्षित प्रसव उपरांत प्रसूता की मौत हो जाने के बाद परिजनों ने जम कर बवाल काटा. हंगामा के दौरान जहां आक्रोशित परिजनों ने प्रसव कक्ष के फर्नीचर को अपना निशाना बनाया वहीं परिजनों के आक्रोशित रूप को देख अस्पताल कर्मी भी भाग खड़े हुए.
नतीजतन प्रसव कक्ष में भर्ती अन्य प्रसूता की भी जान पर बन गयी. प्रसूता के चीखने-चिल्लाने की आवाज को सुन उनके परिजन भी भड़क उठे और अस्पताल कर्मियों को अपना निशाना बनाना प्रारंभ कर दिया. घटना की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ कामिनी वाला, थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर आफताब अहमद, महिला थानाध्यक्ष महाश्वेता सिन्हा के साथ-साथ भारी संख्या में पुलिस बल सदर अस्पताल पहुंच गयी और आक्रोशित लोगों को समझा बुझा कर शांत कराने के प्रयास में जुट गयी.
परिजन सदर अस्पताल की महिला चिकित्सक शबनम यासमीन पर मरीजों की जान से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए उनकी बर्खास्तगी की मांग पर अड़े थे. घटना की जानकारी मिलते ही सिविल सर्जन डा परशुराम प्रसाद व एसडीओ मो शफीक भी सदर अस्पताल पहुंचे. परंतु आक्रोशित लोगों ने उन्हें भी अपने कोप का शिकार बना डाला. काफी देर तक चले हो हंगामे के बाद आखिरकार जब पुलिस ने कड़ा रूख अख्तियार किया तब जाकर आक्रोशित लोग शांत हुए.
घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार स्थानीय मझिया निवासी जहरुन निशा 20 वर्ष को मंगलवार को प्रसव पीड़ा के उपरांत परिजनों ने उसे सुरक्षित प्रसव के लिए दोपहर 2.10 बजे सदर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां 3.05 बजे उसने सामान्य प्रसव के द्वारा पुत्री को जन्म दिया था. परंतु कुछ ही देर बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी. प्रसव कक्ष में ड्यूटी पर तैनात कर्मियों ने फौरन महिला चिकित्सक शबनम यासमीन को घटना की जानकारी दी.
परंतु अपने निजी क्लिनिक में व्यस्त होने के कारण वे अस्पताल नहीं पहुंच सकी. इधर, जहरून की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी. घटना की जानकारी अस्पताल उपाधीक्षक डा आरपी सिंह को मिलते ही उन्होंने ने भी महिला चिकित्सक को फौरन अस्पताल पहुंचने का निर्देश दिया परंतु महिला चिकित्सक ने डीएस के आदेश को भी अनसुना कर दिया. नतीजतन जहरून तड़पती रही परंतु उसे समुचित चिकित्सा सुविधा प्राप्त न हो सकी और उसने दम तोड़ दिया. हालांकि उसकी मौत के कुछ क्षणों के बाद ही डा शबनम यास्मीन सदर अस्पताल पहुंच गयी थी. मरीज की मौत की जानकारी अस्पताल कर्मियों ने गुप्त रखा और उसे किसी तरह अस्पताल से निकालने की जुगत में लग गये.
परंतु एंबुलेंस चालक द्वारा इनकार किये जाने से उनकी सारी चाल धरी की धरी रह गयी. जहरून निशा के इलाज के अभाव में मौत हो जाने तथा सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष में तैनात कर्मियों द्वारा मरीज के परिजनों से दो हजार रुपये ऐंठ लिये जाने की जानकारी अन्य परिजनों को मिलते ही वे अपना आपा खो बैठे और जमकर बवाल करना प्रारंभ कर दिया.
मृतक के परिजनों ने जोर-जोर से चिल्ला रहे थे कि डा यास्मीन के डयूटी के ही दौरान सदर अस्पताल में अधिकांश प्रसूता की मौत होती है. अस्पताल प्रशासन और पुलिस प्रशासन उसे बार-बार बचाना चाहती है. बिलखते हुए परिजनों ने कहा कि ऐसे चिकित्सक सदर अस्पताल को बदनाम कर अपने क्लिनिक को चमकाने में लगे हैं.
