जिले में पांव पसार रहा एड्स

किशनगंज : एड्स जैसी जानलेवा बीमारी किशनगंज जिले में तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद अपना पांव पसार रही है. अशिक्षा व गरीबी की मार झेल रहे युवक रोजगार की तलाश में लगातार महानगरों की ओर पलायन करते जा रहे हैं, जहां वे असुरक्षित यौन संबंध बनाने के एवज में लगातार एचआइवी जैसी घातक बीमारियों की […]

किशनगंज : एड्स जैसी जानलेवा बीमारी किशनगंज जिले में तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद अपना पांव पसार रही है. अशिक्षा व गरीबी की मार झेल रहे युवक रोजगार की तलाश में लगातार महानगरों की ओर पलायन करते जा रहे हैं, जहां वे असुरक्षित यौन संबंध बनाने के एवज में लगातार एचआइवी जैसी घातक बीमारियों की चपेट में आते जा रहे है. यह बीमारी पहले उनकी पत्नियों को और फिर पत्नी के गर्भ में पल रहे बच्चे को भी अपना शिकार बना लेती है.

सरकारी आंकड़ों पर यदि गौर करें, तो प्रतिवर्ष पूरे भारत वर्ष में 1.16 लाख लोग एचआइवी की चपेट में आ जाते है. सीमांचल व खास कर किशनगंज जिले में तो स्थिति और भी भयानक है. वर्ष 1986 में एचआइवी संक्रमण का पहला मामला भारत में पाये जाने के बाद एचआइवी संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है. स्थिति की भयावहता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि आज भारत दुनिया में एचआइवी संक्रमित लोगों की सूची में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है,

जबकि किशनगंज जिले में एचआइवी संक्रमित रोगियों की संख्या पूरे सूबे में सर्वाधिक है. हालांकि इस पर रोकथाम के लिए वर्ष 1992-99 तक भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण अभियान के पहले चरण की शुरुआत की गयी थी. वर्ष 2007-09 में अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत की गयी थी. वहीं वर्ष 2012 से चौथा चरण प्रारंभ कर दिया गया है.

इस दौरान अत्यधिक संक्रमण वाले स्थानों का चयन कर इस पर रोक लगाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है. हालांकि सरकारी आंकड़ों पर गौर करें, तो एचआइवी संक्रमित राज्यों की संख्या में सूबे का स्थान 5वां है. परंतु जिस तरह से संक्रमण के नये मामले सामने आ रहे हैं वह चिंता का कारण जरूर बन गया है. जिले के एचआइवी संक्रमित रोगियों की जांच के लिए स्थानीय सदर अस्पताल में आइसीटीसी सेंटर की स्थापना की गयी है. वर्ष 2014 में इस सेंटर में जहां 1510 लोगों की एचआइवी जांच की गयी, तो मात्र तीन लोगों से ही यह रीएक्टिव पाया गया था. परंतु वर्ष 2015 सदर अस्पताल स्थित आइसीटीसी सेंटर में कुल 3783 लोगोें के एचआइवी जांच के दौरान 14 लोगों में यह रीएक्टिव पाया गया. वहीं सदर अस्पताल स्थित आइसीटीसी वॉलेंट्री काउंसेलिंग टेस्टिंग सेंटर वीसीटीसी में अगस्त 2014 से मार्च 2015 के दौरान 1071 पुरुष व 868 महिलाओं की एचआइवी जांच किये जाने के उपरांत 83 पुरुष व 44 महिलाओं में एचआइवी के लक्षण पाये गये थे.

अप्रैल 2015 से दिसंबर 2015 तक इस सेंटर में 1475 पुरुष व 800 महिलाओं की जांच किये जाने के उपरांत 76 पुरुष व 63 महिलाओं में एचआइवी के लक्षण पाये जाने से जहां जिले के स्वास्थ्य कर्मियों के पेशानी पर बल पड़ गये है वहीं स्थिति की भयावहता को देखते हुए जिले का बुद्धिजीवी वर्ग भी चिंतित है.

क्या कहते हैं चिकित्सक
इस संबंध में पूछे जाने पर सदर अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डा देवेंद्र कुमार ने बताया कि एचआइवी को ह्यूमेन इम्यून डिफिशंसी वाइरस के नाम से जाना जाता है. उन्होंने बताया कि यह एक संक्रामक बीमारी है जो हमारे इम्यून सिस्टम पर असर करती है. उन्होंने कहा कि एचआइवी को लेकर आज हम कई प्रकार की भ्रांतियों के शिकार हैं तथा एचआइवी टेस्ट को लेकर काफी शरमाते भी हैं. उन्होंने कहा कि असुरक्षित यौन संबंध संक्रमित सूई, खून उपयोग करने से, एचआइवी संक्रमित मां से शिशु को, एचआइवी संक्रमित अंग प्रत्यारोपण आदि से यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच जाता है.
उन्होंने कहा कि सुरक्षित यौन संबंध, डिस्पोजेबल सुई व सिरिंज का इस्तेमाल कर, दूसरे व्यक्ति के रक्त की जांच कर आदि से इस रोग से बचा जा सकता है. डा कुमार ने बताया कि एचआइवी पॉजीटिव व्यक्ति में 7 से 10 साल बाद विभिन्न प्रकार की बीमारियों के लक्षण प्रतीत होने लगते है और अंतत: रोगी जीवन भर के संक्रमण एवं दर्दनाक मौत के शिकार हो जाते हैं.

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