किशनगंज : बिहारियों के तन से कपड़ा छीनना चाह रही है नीतीश-लालू की सरकार. यहीं वजह है कि कपड़े पर वैट लगाकर आमजनों पर अनाअवश्यक आर्थिक बोझ प्रदेश सरकार बढ़ाने पर आमादा है. पहले से आर्थिक तंगी झेल रहे आम आदमी को अब कपड़े के लिए पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल की तुलना में महंगे दर पर कपड़े खरीदने होंगे. इतना ही नहीं नीतीश सरकार मिठाई व समोसे पर टैक्स लगाकर इसे भी आम आदमी की पहुंच से दूर करना चाहती है.
ये बातें पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कही. वे सोमवार की शाम को विधान पार्षद सह एमजीएम कालेज के निदेशक डा दिलीप कुमार जायसवाल के आवास पर पत्रकारों से मुखातिब थे. उन्होंने कहा कि नीतीश-लालू सरकार व्यापारियों से चुनावी बदला ले रही है. नीतीश बिहार सरकार के कप्तान भले हो लेकिन सरकार वास्तव में लालू के इशारे पर ही चल रही है. बिहार के लोग एक सरकार चाह रही थी लेकिन यहां दो-दो सरकारें चल रही है
एक छोटा सरकार (नीतीश) और दूसरा बड़े सरकार (लाूल प्रसाद) की. बिहार में इन दिनों अपराधियों पर कोई नियंत्रण नहीं है. हर रोज अपराध का ग्राफ बिहार में बढ़ता जा रहा है जिससे आम जनों में असुरक्षा की भावना घर करती जा रही है. उन्होंने बताया कि नीतीश सरकार द्वारा निबंधन शुल्क बढ़ा दिये जाने से भी लोग खासे परेशान है. अब बिहार में गरीब जमीन नहीं खरीद सकता है. इसलिए भाजपा चैन से बैठने वाली नहीं है. भाजपा जनहित की मुद्दों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी.
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक केंद्रीय विश्वविद्यालय है. यहां देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी के समय से ही एएमयू केंद्रीय विश्वविद्यालय है यहां अल्पसंख्यकों के लिए कोई आरक्षण का प्रावधान नहीं है. उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट के फूल बेंच के निर्णय के अनुसार एएमयू एक देश का केंद्रीय विश्व विद्यालय है. जिसमें केंद्र सरकार प्रति वर्ष 1300 करोड़ रूपये अनुदान देते है.
