जिले में आत्महत्या का ग्राफ चढ़ा
2014 में 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक 232 लोगों ने की आत्महत्या
2015 में 280 लोगों ने की आत्महत्या
किशनगंज : हाल के दिनों में मामूली विवाद के बाद आत्महत्या कर लेने की घटनाओं में काफी तेजी देखी जा रही है. यदि आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति की भयावहता भी खुद व खुद परिलक्षित हो जाती है. वर्ष 2014 में 1 जनवरी से लेकर 31 दिसंबर के बीच पूरे जिले में जहां 232 लोग और वर्ष 2015 में 280 लोग अकाल ही काल के गाल में समा गये. वहीं 41 लोगों ने मामूली विवाद के बाद विषपान कर मौत को गले लगा लिया.
वर्ष 2013 में विषपान कर मौत को गले लगाने वालों की संख्या मात्र 27 थी, जबकि इसके अतिरिक्त भी कई ऐसे मामले जिले में घटित हुए हैं, जिन्हें प्रशासन की नजरों में आने से पहले ही रफा-दफा कर दिया गया है. विषपान कर मौत को गले लगाने की इस प्रवृत्ति में आयी अचानक वृद्धि से जिले के बुद्धिजीवी वर्ग भी हैरान व परेशान हैं.
क्या कहते हैं समाजसेवी
इस संबंध में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाजसेवी नीरज कुमार ने कहा कि आज की भागमभाग भरी तेज रफ्तार जिंदगी में लोग आगे बढ़ने की होड़ में इस तरह से उलझ जाते हैं कि उनके अपने भी उनसे दूर चले जाते हैं. परिवार व समाज से बढ़ती दूरियों के कारण जब समस्याओं की मकड़ जाल में वे बुरी तरह से उलझ जाते हैं, तो उनके पास आत्महत्या कर लेने के सिवा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं बचता है. परंतु आवेश में उठाये गये इस कदम के बाद कईयों की दुनियां सुनी पड़ जाती है.
