किशनगंज: दिघलबैंक प्रखंड मुख्यालय के मुख्य द्वार पर पिछले 75 घंटों से जारी आमरण अनशन गुरुवार दोपहर को स्थानीय विधायक और जदयू नेता नौशाद आलम के द्वारा चार महीने के भीतर हर हाल में स्टेट हाईवे 99 का निर्माण कार्य प्रारंभ करने से संबंधित शपथ पत्र और आश्वासन के बाद समाप्त हुआ.
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि निर्धारित समय में कार्य शुरू होता है या नहीं, गौरतलब है कि जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा व विभागीय अधिकारियों की उदासीनता से जर्जर दिघलबैंक-बहादुरगंज सड़क की हालत जानलेवा बनी है.
इससे क्षेत्र की करीब दो लाख आबादी से जुड़ इलाकों का विकास भी बाधित है. अपनी जिंदगी के 80 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों की मानें तो आजादी के बाद से अब तक इस सड़क को किसी ने भी लगातार छह माह तक दुरुस्त हालत में नहीं देखा है. वर्तमान स्थिति यह है कि नेपाल सीमा दिघलबैंक से बहादुरगंज तक सड़क की गिट्टी उखड़कर अपनी बदहाली की व्यथा बयां कर रही है.
हरवाडांगा, टप्पू, तुलसिया, जनता, समेशर, बिरनियां चौरासी सहित पूरे दिघलबैंक प्रखंड क्षेत्र औऱ बहादुरगंज की करीब तीन लाख आबादी का जिला मुख्यालय आना-जाना होता है.लंबे समय से इंतजार कर रहे लोगों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया और विवश होकर प्रखंड के एक दर्जन युवाओं ने अन्न जल त्याग कर आमरण अनशन पर बैठ गये.
अंतरराष्ट्रीय सीमा को जोड़ने के बावजूद बदहाल है सड़क
स्टेट हाईवे 99 और दिघलबैंक प्रखंड का सामरिक महत्व काफी अधिक है. एसएसबी के आधा दर्जन कैंप इसी मार्ग से जुड़ा हुआ है. जिला मुख्यालय से सबसे कम दूरी तय इसी मार्ग से नेपाल कम समय में पहुंचा जा सकता है. इसकी अलावे प्रखंड के 16 पंचायत भी इसी मार्ग से किसी न किसी प्रकार से जुड़ा हुआ है.
23 किलोमीटर में पूरी तरह क्षत-विक्षत है सड़क
बहादुरगंज के चौरासी से दिघलबैंक सीमा तक ये सड़क पूरी तरह से क्षत-विक्षत अवस्था में है. दरअसल स्टेट हाईवे के रूप चिह्नित होने के बावजूद आज तक इसे कभी स्टेट हाईवे का दर्जा नहीं दिया गया. सिर्फ बोर्ड लगाकर छोड़ दिया गया और ये पूरी सड़क अपनी पुरानी स्थिति में ही बरकरार रही वर्तमान में पूरी सड़क बड़े-बड़े गढ्ढे में बदल चुकी है. जिस पर चलना जान जोखिम में डालने के बराबर है और इस वजह से क्षेत्र का विकास भी प्रभावित हो रहा है.
