किशनगंज : जल संरक्षण का महत्वपूर्ण श्रोत कुआं हमारी प्राचीन सभ्यता व संस्कृति का हिस्सा अवश्य रहा है. एक समय था जब इससे लोगों की प्यास बुझती थी. लेकिन अब ऐसा नहीं. तपती दुपहरिया में अब लोगों की इससे प्यास नहीं बुझ पाती. कभी पूरे क्षेत्र की पेयजल एवं सिंचाई कुआं पर आधारित थी. अमूमन हर गांवों में 8-10 कुआं होता था.
सरकारी स्तर पर कुआं बनाने के लिए कोई योजना नहीं पौआखाली थाना क्षेत्र में कुल गांवों की संख्या 45 है. मगर आज इन गांवों में कुंआ का अस्तित्व मिटते जा रहा है.
ग्राम पंचायत में कुल 14 वार्डों में पौआखाली बाजार से सटे मुहल्लों, शीमलबाड़ी, शीशागाछी, एलआरपी चौक, पवना, होदीखोदरा, मीरभिट्टा आदि गांवों में अस्सी फीसदी लोगों के घरों में कुएं के स्थान पर लगे हैंडपंप से आयरन युक्त पानी निकल रहा है, जिसे ना चाहते हुए भी पीकर अपनी प्यास बुझा रहे है.
अभियान चलाने की जरूरत कुंआ के अस्तित्व को बचाने के लिए लोगों के बीच जागरूकता फैलाने में लगे सिकंदर पटेल कहते हैं. कुंआ को संरक्षित कर भू-गर्भीय जल स्तर को गिरने से बचाया जा सकता है.
ग्रामीण इलाकों के पुराने कुएं को साफ कर बरसात के पानी को उसमें पहुंचा कर गिरते जलस्तर की रोकथाम का प्रयास सार्थक सिद्ध हो सकता है. ग्रामीण मनोज सिन्हा, सेवानिवृत शिक्षक चक्रधर प्रसाद सिन्हा के अनुसार, गांवों में कुआं को ‘इंद्रासन माता’ माना जाता था एवं इनका विधिवत विवाह कराया जाता था.
कहते हैं चिकित्सक
कुएं के पानी का सेवन करने वाले लोगों को पेट संबंधित बीमारियां कम होती हैं. क्योंकि इसमें आर्सेनिक एवं अन्य हानिकारक तत्वों की मात्रा कम होती है. बशर्ते कुएं को समय-समय पर सही ढंग से सफाई कराकर ढका होना चाहिए.
देवेंद्र प्रसाद, आईएमए के पदाधिकारी
आयरन युक्त पानी एक समस्या
पंचायत में आयरन युक्त पानी एक गंभीर समस्या है हर घर में शुद्ध पेयजल लोगों को नसीब हो इसके लिए तेजी से समुचित प्रयास और जन चेतना की आवश्यकता है. सरकार की महत्वकांक्षी योजना हर घर नलजल योजना पूरे पंचायत में जरूरी है तभी लोगों को इस संकट से मुक्ति मिल पायेगी.
जरदीश हुसैन, मुखिया, ग्राम पंचायत,पौआखाली
