किशनगंज : किशनगंज जिले के किसान मक्का (मकई) की खेती कर आर्थिक रूप से मजबूत बन रहे है. किसानों का आर्थिक विकास मक्के पर जा टिका है. छोटे व बड़े किसान मक्का लगाने में रुचि रखते है. जबकि किसानों का पटुआ व अदरक की फसल से किसानों का मोहभंग हो गया है. किसानों की माने तो कम लागत में मक्के का ज्यादा उत्पादन होता है.
जिस कारण हर साल मक्का की खेती बढ़ती जा रही है. कृषि विभाग की माने तो जिले में रबी फसलों में सबसे अधिक मक्का की फसल लगायी गयी है. इस रबी मौसम में किशनगंज में 9047 हेक्टर में मक्का लगायी गयी है. जबकि विभागीय लक्ष्य 3 हजार हेक्टर रखा गया था. लक्ष्य से तीन गुना भू-भाग में मक्का लगाना साफ संकेत देता है कि किसान अन्य फसलों की तुलना में मक्के की ओर ज्यादा आकर्षित हुए है.
एक वक्त था जब किशनगंज अदरक व पाट (पटुआ)की खेती के लिए जाना जाता था,अभी भी पोठिया प्रखंड में पटुआ की खेती सबसे अधिक होती है. मौसम का मिजाज ठीक रहा तो जिले में करीब 76 हजार 8 सौ एमटी मक्के का इस वर्ष उत्पादन होगा. किशनगंज जिले में सबसे अधिक मक्का उत्पादन ठाकुरगंज,पोठिया व दिघलबैंक प्रखंड में होता है
मक्का उत्पादन से किसान हो रहे सशक्त जिले में मक्का फसल की उत्पादन व कीमत अच्छा मिलने से किसानों के लिये यह फसल वरदान साबित हो रहा है. माध्यम वर्गीय किसान मक्का को नगदी फसल के रूप में स्वीकार कर लिया है. जिले में मक्का का उत्पादन भी सबसे अधिक होता है. यह सिलसिला पिछले एक दशक से जारी है. यहां के किसान मकई की खेती बड़े चौउ से करते है.
क्या कहते हैं डीएओ
किसान मक्का (मकई) की खेती कर आर्थिक रूप से मजबूत बन रहे है. किसानों का आर्थिक विकास मक्के पर जा टिका है. साल में तीन बार मक्का की खेती किशनगंज जिले में की जाती है. प्रति हेक्टर मक्का उत्पादन करीब 85-90 कुंटल होता है. इस बार 9047 हेक्टर में मक्का फसल लगायी गयी है.
संत लाल साह, जिला कृषि पदाधिकारी
