किशनगंज : जिला न्यायिक परिसर में 5वीं नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया. इसका शुभारंभ जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश प्रसाद सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया. इस दौरान उनके साथ प्रधान न्यायाधीश केशव मूर्ति तिवारी, एडीजे प्रथम सत्येंद्र पांडेय, प्राधिकार के सचिव प्रबल दत्ता, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष नुरूस सोहेल, दफ्तरी टी स्टेट के प्रबंधक निदेशक राजकरण दफ्तरी भी मौजूद रहे. राष्ट्रीय लोक अदालत में 1142 वादों का निस्तारण किया गया.
इनमें बैंक 1067, अपराधिक मामला 70 और दो वैवाहिक और श्रम विभाग के तीन मामलों का निस्तारण हुआ. इन वादों में तमाम वादी ऐसे भी थे जो लंबे समय से न्याय पाने के लिए चक्कर काट रहे थे. उन सभी के चेहरों पर मुस्कान साफ नजर आ रही थी.जिला जज व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष दिनेश प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में लोक अदालत संपन्न हुई. जिला जज श्री सिंह ने कहा कि लोक अदालतों के साथ जहां आम लोगों को राहत मिलती है वहीं लोगों के समय व पैसों की बचत होती है.
लोक अदालत में फैसला होने के बाद केस में लगी सारी कोर्ट फीस वापस मिल जाती है. इसके फैसले को दिवानी अदालत की डिग्री की मान्यता प्राप्त है. इसके फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं हो सकती. लोक अदालत में मामलों त्वरित निष्पादन हो जाता है. जिसे आमजन को काफी फायदा होता है. जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष नुरूस सोहेल ने कहा कि लोक अदालत में विभिन्न मामलों का एक दिन में निष्पादन हो जाने से आमजन को काफी राहत मिलती है. जिसे न्यायिक प्रक्रिया के प्रति लोगों की आस्था और मजबूत होती है. जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव प्रबल दत्ता ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत ने बताया कि इस बार 1142 मामलों को मौके पर निबटाया गया है.
वहीं अन्य कई मामलों का भी जल्द निबटारा किया जायेगा. उन्होंने बताया कि जिले में लोक अदालत में सबसे अधिक मामले बैंकों से जुड़े आते हैं. जिनके माध्यम से ऐसे लोगों को राहत देने के लिए लोक अदालत में बुलाया जाता है. उन्होंने बताया कि लोगों को इस तरह के कार्यक्रमों का लाभ उठाना चाहिए. क्योंकि इनमें लोगों को बहुत राहत दी जाती है. इससे पूर्व डीजे दिनेश प्रसाद सिंह ने न्यायालय परिसर में लिगल एंड क्लिनिक का भी शुभारंभ किया. इस मौके पर न्यायिक पदाधिकारियों के साथ-साथ विधिक सेवा प्राधिकारी के सचिव प्रबाल दत्ता, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष नुरूस सोहेल, राजबाड़ी टी के प्रबंधक निदेशक राजकरण दफ्तरी सहित अन्य मौजूद थे.
