मानसून की बेरुखी: सूखे की कगार पर खेत, महंगे डीजल के दम पर फसल बचाने की जंग में जुटा अन्नदाता

Weather: आसमान में बादल हैं, लेकिन बारिश नहीं. ऐसे में खेत सूखने लगे हैं और किसान पंपसेट के सहारे फसल बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं. डीजल की बढ़ती कीमतों ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है.

खगड़िया से पलटु झा की रिपोर्ट

Weather: खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड में मानसून की धीमी रफ्तार किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है. लगातार बारिश नहीं होने से खेतों की नमी खत्म होने लगी है. धान सहित खरीफ फसलों को बचाने के लिए किसान डीजल चालित पंपसेट से सिंचाई कर रहे हैं. इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और छोटे किसानों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ता जा रहा है.

बारिश नहीं होने से सूखने लगे खेत

परबत्ता प्रखंड के कई गांवों में पिछले कई दिनों से अच्छी बारिश नहीं हुई है. आसमान में बादल छाने के बावजूद वर्षा नहीं होने से खेतों की मिट्टी सूखने लगी है. जिन किसानों ने समय पर धान की रोपाई या बुआई की थी, उनकी फसल अब पानी के अभाव में प्रभावित होने लगी है. किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है.

पंपसेट बना किसानों का सहारा

फसल को सूखने से बचाने के लिए किसान पंपसेट के माध्यम से सिंचाई कर रहे हैं. अधिकांश किसान डीजल चालित पंपसेट का उपयोग कर रहे हैं. लगातार सिंचाई करने से डीजल की खपत बढ़ रही है, जिससे खेती का खर्च भी तेजी से बढ़ता जा रहा है. सीमांत और छोटे किसानों के लिए यह स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण बन गई है.

डीजल की बढ़ती कीमत ने बढ़ाई मुश्किल

किसानों का कहना है कि एक ओर बारिश नहीं हो रही है, दूसरी ओर डीजल की बढ़ती कीमतों ने खेती को और महंगा बना दिया है. सिंचाई के लिए बार-बार डीजल खरीदना पड़ रहा है. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है और खेती करना पहले की तुलना में अधिक खर्चीला हो गया है.

फसल उत्पादन पर मंडरा रहा संकट

Monsoon Update: ग्रामीण किसानों के अनुसार खेतों में पर्याप्त नमी नहीं रहने से धान, मक्का और अन्य खरीफ फसलों का विकास रुक गया है. कई खेतों में मिट्टी फटने लगी है. यदि आने वाले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है. इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा.

सरकार से राहत की मांग

Weather: किसानों ने सरकार से सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति, डीजल पर राहत और वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि समय पर सरकारी सहायता मिलने से फसल बचाई जा सकती है और किसानों को आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी.

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Published by: Pintu Pranav

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