गोगरी. मुकद्दस माह-ए-रमजान का दूसरा अशरा शुरू हो गया है. मगफेरत का ये अशरा शनिवार की शाम यानी 10 रमजान को इफ्तार के बाद से शुरू हो गया है. जामा मस्जिद शाहनगर जमालपुर के मौलाना अजमल काशमी ने बताया कि दूसरे अशरे को मगफिरत का अशरा कहा जाता है. इस अशरे में रोजेदार रोजे रखकर अल्लाह से मगफिरत की दुआ मांगते हैं. यूं तो रमजान का पूरा महीना मोमिनों के लिए खुदा की तरफ से अजमत वाला व रहमतों और बरकतो से लबरेज है लेकिन अल्लाह ने इस मुबारक महीने को तीन अशरो में तक्सीम किया है. पहला असरा खुदा की रहमत वाला है, जिसमें खुदा की रहमत नाजिल होती है. रमजान का चांद नजर आते ही शैतान कैद कर लिया जाता है. जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं और दोजक के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं. अल्लाह अपनी रहमत से गुनाहगारों को मगफिरत दिलाते हैं. शनिवार को दस रोजे पूरे होने पर रमजान का पहला अशरा पूरा हो गया. दूसरा अशरा रमजान के बीसवें रोजे के सूरज डूबने तक रहेगा. दूसरे अशरे में रोजेदार रोजे रखकर अल्लाह से मगफिरत की दुआ करेंगे. इस दौरान अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा की जाती है. वैसे तो रमजान का हर असरा फजीलत भरा है मगर अंतिम आसरा जहन्नुम से आज़ादी के लिए खास होता है. सबके साथ समाज में गरीब और जरूरतमंदों के साथ हमदर्दी का महीना भी है. रोजेदारों को एक इफ्तार कराने वाले के गुनाह माफ हो जाते हैं. इस महीने में पूरे कुरान की तिलावत की जाती है.
रमजान का पहला अशरा खत्म दूसरा शुरू
मुकद्दस माह-ए-रमजान का दूसरा अशरा शुरू हो गया है. मगफेरत का ये अशरा शनिवार की शाम यानी 10 रमजान को इफ्तार के बाद से शुरू हो गया है
