रमजान के दूसरे जुमा में रोजेदारों ने मांगी देश में अमन-चैन की दुआ

अनुमंडल क्षेत्र के मस्जिदों में रमजान के दूसरे जुमे की नमाज अदा की गयी. इस दौरान रोजेदारों ने अल्लाह से देश में अमन-चैन की दुआ मांगी.

गोगरी. अनुमंडल क्षेत्र के मस्जिदों में रमजान के दूसरे जुमे की नमाज अदा की गयी. इस दौरान रोजेदारों ने अल्लाह से देश में अमन-चैन की दुआ मांगी. दूसरे जुमे को लेकर मुसलमान भाइयों में खासा उत्साह था. रमजान के पाक महीने में दूसरे जुमे को लेकर सुबह से ही रोजेदारों में काफी उत्साह देखा जा रहा था. वैसे तो हर जुमे की एक अलग ही अहमियत होती है, लेकिन रमजान के पाक महीने में प्रत्येक जुमा अपना एक अलग महत्व लेकर आता है. इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना रमजानूल मुबारक है. साल के 12 महीनों में रमजान का अपना विशेष महत्व है तथा रमजान का रोजा काफी महत्वपूर्ण होता है. इसे अल्लाह का महीना भी कहा जाता है. इसी महीने में शब-ए-कद्र आता है और इसी शब-ए-कद्र में कुरान को उतारा गया था. यह कहना है जमालपुर शाह टोला के इमाम मौलाना अजमल कासमी का. उन्होंने बताया की रमजान का महीना पाक और रहमतों वाला होता है.

खास है रमजान का रोजा

रोजा अर्थात उपवास हर कौम में रखा जाता है. इसे रखने के तरीके और अवधि में फर्क होता है, लेकिन रमजान का रोजा कुछ खास होता है. पैगम्बर मोहम्मद को जब अल्लाह ने अपने नबी को 50 दिन का रोजा रखने का हुक्म दिया तो पैगम्बर मोहम्मद की गुजारिश पर बाद में 30 दिनों का रोजा मुसलमानों पर फर्ज किया गया. यह परंपरा 1400 वर्षों से अधिक समय से चली आ रही है. रोजा नमाज और कुरान की तिलावत के बिना अधूरा है. खुदा रोजेदार की दुआ कबूल करते हैं और गुनाहों के लिए माफी भी देते हैं.

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By RAJKISHORE SINGH

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