दिव्यांगता को नहीं, हुनर और हौसले को मिला सम्मान, दो शिक्षकों की कहानी बनी प्रेरणा

शिक्षक दिवस पर बांका के दो दिव्यांग शिक्षकों को शिक्षा में उनके उत्कृष्ट कार्य, लगन और काबिलियत के लिए सम्मानित किया गया। एक पैर से दिव्यांग प्रधानाध्यापक डॉ. विकास सोलंकी और दृष्टिबाधित शिक्षक सच्चिदानंद तांती की प्रेरणादायक कहानियां शारीरिक चुनौतियों पर मानवीय जज्बे की जीत साबित हुई हैं।

परबत्ता (खगड़िया) : शिक्षक दिवस पर सियादतपुर अगुआनी पंचायत के दो दिव्यांग शिक्षकों को जिला प्रशासन की ओर से सम्मानित किया गया. खास बात यह रही कि दोनों शिक्षकों का चयन उनकी दिव्यांगता के आधार पर नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य, लगन और काबिलियत को देखते हुए किया गया. दोनों की कहानी बताती है कि मजबूत हौसले और समर्पण के सामने शारीरिक चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं.

दोनों पैरों से दिव्यांग, फिर भी संभाल रहे स्कूल की पूरी जिम्मेदारी

उच्च माध्यमिक विद्यालय रामचुआ, शंभूगंज, बांका में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत डॉ. विकास सोलंकी दोनों पैरों से दिव्यांग हैं. इसके बावजूद वे विद्यालय संचालन से लेकर शैक्षणिक व्यवस्था तक की जिम्मेदारियों को पूरी कुशलता के साथ निभा रहे हैं.

शिक्षण के साथ साहित्य के क्षेत्र में भी उनकी अलग पहचान है. वे कई पुस्तकों के लेखक हैं. उनकी कार्यशैली, सकारात्मक सोच और शिक्षा के प्रति समर्पण ने उन्हें शिक्षा जगत में अलग पहचान दिलायी है.

डीएम ने जमीन पर बैठकर किया सम्मान

शिक्षक दिवस के अवसर पर बांका के जिला पदाधिकारी ने डॉ. विकास सोलंकी को जमीन पर बैठकर सम्मानित किया. सम्मान का यह दृश्य केवल एक पुरस्कार समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संवेदनशीलता और शिक्षक के प्रति सम्मान का भावुक उदाहरण बन गया.

दृष्टिबाधित शिक्षक की पढ़ाने की शैली बनी मिसाल

वहीं बिहार केसरी उच्च विद्यालय, डुमरिया बुजुर्ग में पदस्थापित शिक्षक सच्चिदानंद तांती दृष्टिबाधित हैं. इसके बावजूद वे हिंदी विषय की पढ़ाई बच्चों को प्रभावी ढंग से कराते हैं. उनकी मेहनत, शिक्षण शैली और समर्पण ने विद्यालय में उन्हें एक मिसाल बना दिया है.

सम्मान के मुख्य बिंदु

  • शिक्षक दिवस पर दो दिव्यांग शिक्षकों को सम्मानित किया गया.
  • दोनों का चयन दिव्यांगता नहीं, बल्कि कार्य और काबिलियत के आधार पर हुआ.
  • डॉ. विकास सोलंकी दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.
  • वे साहित्य के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं और कई पुस्तकों के लेखक हैं.
  • दृष्टिबाधित शिक्षक सच्चिदानंद तांती हिंदी विषय का प्रभावी शिक्षण कराते हैं.
  • डॉ. विकास सोलंकी के सम्मान के दौरान डीएम का जमीन पर बैठना चर्चा का भावुक पल बना.

शारीरिक सीमाएं प्रतिभा की राह नहीं रोक सकतीं

दोनों शिक्षकों की कहानी यही संदेश देती है कि शरीर की सीमाएं इंसान की प्रतिभा को सीमित नहीं कर सकतीं. जब हौसला मजबूत हो और शिक्षा के प्रति समर्पण हो, तो चुनौतियां भी उपलब्धि की सीढ़ी बन जाती हैं.

शिक्षक दिवस पर दोनों शिक्षकों का सम्मान पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बना. साथ ही यह नई पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का संदेश है कि सफलता के लिए सबसे जरूरी चीज परिस्थितियां नहीं, बल्कि हौसला, मेहनत और अपने काम के प्रति ईमानदार समर्पण है.

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लेखक के बारे में

By पलटू झा

पलटू झा प्रिंट माध्यम में 11 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. परबत्ता (खगड़िया) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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