जिलाधिकारी विक्रम विरकर के निर्देश पर यह अभियान 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक जिले के सभी प्रखंडों और नगर निकायों में चलाया जाएगा. इसके तहत जिले के 31 हजार 153 नए परिवारों का राशन कार्ड बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही, समाहरणालय में आयोजित समीक्षा बैठक में डीएम ने बाल संरक्षण और 'परवरिश योजना' में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है.
इन दस्तावेजों के बिना नहीं बनेगा राशन कार्ड, 13 अगस्त तक मौका
प्रशासन ने आवेदनों के पारदर्शी और त्वरित निष्पादन के लिए अनिवार्य कागजातों की सूची जारी की है:
- अनिवार्य कागजात: आवेदन के साथ जाति, निवास एवं आय प्रमाण-पत्र की स्व-अभिप्रमाणित प्रति, परिवार का सामूहिक पासपोर्ट आकार का फोटो और बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की छायाप्रति देना होगा.
- पहचान व संपर्क: इसके अलावा परिवार के सभी सदस्यों के पहचान पत्र (पहचान संख्या) की स्पष्ट छायाप्रति, मोबाइल नंबर तथा सक्रिय ई-मेल आईडी उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा.
- कहां करें आवेदन: योग्य परिवार अपने नजदीकी प्रखंड कार्यालयों, नगर परिषद, नगर पंचायत तथा निर्धारित विशेष शिविरों में जाकर अपना फॉर्म जमा कर सकते हैं.
परवरिश योजना के तहत बच्चों को मिलेंगे ₹1000 प्रति माह
जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति (DCWPC) की बैठक में डीएम विक्रम विरकर ने बच्चों के अधिकारों को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया:
- परवरिश योजना को प्राथमिकता: अनाथ, बेसहारा, एचआईवी या कुष्ठ रोग से पीड़ित/प्रभावित बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक मिलने वाली ₹1000 मासिक वित्तीय सहायता का लाभ हर हाल में सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.
- घर-घर होगा सर्वे: डीएम ने विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) एवं अल्पसंख्यक समुदायों के जरूरतमंद बच्चों की पहचान के लिए विभागीय समन्वय से माइक्रो प्लान बनाकर घर-घर सर्वे करने को कहा है.
बाल श्रम के खिलाफ चलेगा संयुक्त रेस्क्यू अभियान: डीएम
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को फील्ड में उतरकर बाल श्रम और बाल तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया:
"जिले में बच्चों के अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. बाल श्रम उन्मूलन के लिए पुलिस और श्रम विभाग संयुक्त रूप से सघन रेस्क्यू अभियान चलाएं. मुक्त कराए गए बच्चों के पुनर्वास, शिक्षा, आयु सत्यापन और सामाजिक जांच प्रतिवेदन (SIR) की प्रक्रिया को समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए. दत्तक ग्रहण (एडॉप्शन) की प्रक्रियाओं को भी पूरी पारदर्शिता के साथ अमलीजामा पहनाया जाए." — विक्रम विरकर, जिलाधिकारी, खगड़िया
