स्वास्थ्य विभाग (बी.एम.एस.आई.सी.एल.) के प्रबंध निदेशक ने स्थानीय स्तर पर सुरक्षा गार्ड आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन व एकरारनामा को ठहराया अवैध. सिविल सर्जन ने जनवरी 2024 में स्वास्थ्य विभाग के गाइडलाइन को ताक पर रख कर प्रभाष एंड एलाईट जे.डी प्रा.लि. पटना के साथ किया अनुबंध (एकरारनामा)
खगड़िया.
पटना में बनने वाले स्वास्थ्य विभाग के नियम कायदे खगड़िया सिविल सर्जन सहित जिला स्वास्थ्य समिति के लिये कोई मायने नहीं रखते हैं. 6 जनवरी 2024 को जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा विभिन्न सरकारी अस्पतालों/कार्यालयों/स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा के लिए मैन पावर आउटसोर्सिंग एजेंसी का चयन व एकरारनामा अवैध तरीके से करने का खुलासा हुआ है. स्वास्थ्य विभाग (बी.एम.एस.आई.सी.एल.) के प्रबंध निदेशक धर्मेन्द्र कुमार ने जिला स्तर पर सुरक्षा गार्ड आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन व एकरारनामा को अवैध ठहराया है. प्रबंध निदेशक ने स्वास्थ्य विभाग के निर्देश की अवहेलना कर आउटसोर्सिंग एजेंसी चयन के लिए सिविल सर्जन/अधीक्षक व डीपीएम को दोषी करार देते हुये कार्रवाई के लिए 11 जून को अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखा है.प्रभाष एण्ड एलाईट जे.डी प्रा.लि. पटना के साथ एकरारनामा अवैध
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को भेजे पत्र में स्वास्थ्य विभाग के प्रबंधक निदेशक साफतौर पर कहा है कि जिला स्वास्थ्य समिति व सिविल सर्जन डॉ. अमिताभ कुमार ने प्रभाष एण्ड एलाईट जे.डी प्रा.लि. पटना के साथ आउटसोर्सिंग के तहत मैन पावर/सुरक्षा गार्ड/सुपरवाइजर की बहाली के लिए किया गया अनुबंध अवैध है. स्वास्थ्य विभाग के पत्रांक 10(7) दिनांक 21.04.2023 के माध्यम से निर्गत दिशा-निदेश की अवहेलना करते हुए एकरारनामा कर आउटसोर्सिंग एजेंसी को कार्यादेश दिया गया है. इसके लिए संबंधित सिविल सर्जन/अधीक्षक/डी.पी.एम. दोषी हैं. स्वास्थ्य विभाग की इसमें किसी प्रकार की कोई भूमिका नहीं है. इधर, स्वास्थ्य विभाग पटना द्वारा अनुबंध को अवैध करार देने के बाद आउटसोर्सिग एजेंसी द्वारा फरवरी महीने में करीब 213 सुरक्षा गार्ड/सुपरवाइजर की बहाली नजायज हो गयी है. इधर, जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा गलत तरीके से आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन/एकरारनामा में बड़े पैमाने पर पैसों के खेल की चर्चा जारों पर है. पूरे मामले में पक्ष जानने के लिए सिविल सर्जन के सरकारी मोबाइल पर कई बार रिंग किया गया लेकिन संपर्क नहीं हो पाया.सीएस ने स्वास्थ्य विभाग के गाइडलाइन को ताक पर रखा
स्वास्थ्य विभाग के पत्रांक 10 (7) दिनांक 21.04.2023 द्वारा सभी स्वास्थ्य संस्थानों “विभिन्न प्रकार के मैनपावर आऊसोर्सिंग के माध्यम से लेने के लिए केन्द्रीकृत रूप से निविदा प्रकाशित करने के निर्णय के आलोक में स्थानीय स्तर पर नई निविदाओं के प्रकाशन सहित पूर्व में प्रकाशित लेकिन अनिष्पादित निविदाओं के निष्पादन पर रोक लगा दी गयी थी. इधर, स्वास्थ्य विभाग के उपरोक्त गाइडलाइन/दिखा निर्देश को ताक पर रख सिविल सर्जन डॉ. अमिताभ कुमार व जिला स्वास्थ्य समिति ने खेला कर दिया. बताया जाता है कि 6 दिसंबर 2023 को आउटसोर्सिंग एजेंसी चयन की निविदा निकाल दी गयी. जिला स्तर पर निविदा समिति ने 31 दिसंबर 2023 को प्रभाष एलाइट जेडी प्राइवेट लिमिटेड (कंकरबाग, पटना) नामक एजेंसी को आउटसोर्सिंग एजेंसी के रुप चयनित कर कार्यादेश दे दिया. जिसके बाद 6 जनवरी 2024 को सिविल सर्जन व चयनित आउटसोर्सिंग एजेंसी ने एकरारनामा के कागज पर हस्ताक्षर किया. जबकि एजेंसी ने 10 फरवरी से विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा गार्ड की सेवा देना शुरू कर दिया.सुरक्षा गार्ड की बहाली में 50 लाख रुपये की अवैध वसूली
जिले के सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल, विभिन्न कार्यालयों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, एएनएम, जीएनएम स्कूल, पारा मेडिकल संस्थान में कुल 213 सुरक्षा गार्ड की बहाली आउटसोर्सिंग एजेंसी प्रभाष एंड एलाइट जेडी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा की गयी है. कई सुरक्षा गार्ड ने बताया कि बहाली में 25 से 50 हजार रुपये घूस (रिश्वत) देना पड़ा. इस प्रकार जिले के स्वास्थ्य संस्थानों में 213 सुरक्षा गार्ड की बहाली में करीब 50 लाख रुपये की अवैध वसूली के खेल होने की चर्चा जोरों पर है.वर्तमान में कार्यरत कई सुरक्षा गार्ड ने बताया कि बहाली में कोई लिखित कागजात नहीं दिया गया. चार महीना पहले 10 फरवरी को मौखिक रुप से बहाली होने की बात कह कर ड्यूटी पर लगा दिया गया.एकरारनामा के अनुसार प्रत्येक भूतपूर्व सैनिक को 38500 रुपये, प्रशिक्षित सुपरवाइजर को 33600 रुपये, प्रशिक्षित सुरक्षा गार्ड को 27600 रुपये की दर से आउटसोर्सिंग एजेंसी को जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा भुगतान किया जाने का प्रावधान है. इधर, मिली जानकारी अनुसार एजेंसी ने प्रत्येक सुरक्षा गार्ड 10,500 रुपये प्रति माह की दर से मिलने व उसमें से 2500 रुपये कटौती करने की बात कही गयी. इस प्रकार प्रत्येक सुरक्षा गार्ड के लिए सरकार से 27500 रुपये आउटसोर्सिंग एजेंसी को मिला लेकिन प्रत्येक सुरक्षा गार्ड को प्रति माह मिलता मात्र 8000 रुपये.———————–
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