चौथम से धीरज सिंह बंटू की रिपोर्ट:
Khagaria news: चौथम प्रखंड परिसर में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) द्वारा लाखों रुपये की लागत से निर्मित जलमीनार इन दिनों महज शोभा की वस्तु बनकर रह गई है. नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है.
स्थानीय ठाकुरबाड़ी के पंडित मतीन्द्र नाथ मिश्र ने बताया कि प्रखंड परिसर स्थित जलमीनार से वर्ष में कभी-कभार एक-दो माह ही पानी की आपूर्ति होती है. उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत करने पर विभागीय कर्मी कभी बिजली रिचार्ज नहीं होने तो कभी मोटर खराब होने का हवाला देकर मामले को टाल देते हैं.
स्थानीय निवासी राजेश सिंह, सज्जन सिंह, फरेश सिंह, पंकज राय, मुन्ना राय और सुजीत कुमार ने कहा कि सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना धरातल पर सफल होती नहीं दिख रही है. उनका कहना है कि जब प्रखंड मुख्यालय में स्थित जलमीनार की यह स्थिति है, तो ग्रामीण और दियारा क्षेत्रों में योजना की हालत का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है.
ग्रामीणों का आरोप है कि जलमीनार निर्माण के बाद से उन्हें कभी भी नियमित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो सका. उन्होंने बताया कि लंबे समय तक जलापूर्ति बंद रहने के कारण लोहे के पाइपों में जंग लग जाती है. इसके बाद जब पानी की आपूर्ति शुरू होती है तो नलों से लाल रंग का पानी निकलता है, जो पीने योग्य नहीं होता.
स्थानीय लोगों ने विभाग से अविलंब जलमीनार की मरम्मत कर नियमित और स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है.
इस संबंध में पीएचईडी के कनीय अभियंता (जेई) ने बताया कि जलमीनार की मोटर में खराबी आ गई है. मोटर की मरम्मत कर जल्द ही नियमित जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी.
