गोगरी (खगड़िया) से रणवीर झा की रिपोर्ट.
Khagaria Monsoon : जून अब विदाई की दहलीज पर है. खेत तैयार हैं, किसान तैयार हैं, लेकिन आसमान अब भी खामोश है. गांवों में हर दिन किसान बादलों का इंतजार कर रहे हैं. सुबह से शाम तक नजरें आसमान पर टिकी रहती हैं, लेकिन बारिश की उम्मीद बार-बार टूट रही है. समय पर मॉनसून नहीं आने से खगड़िया जिले में धान की खेती पर संकट गहराने लगा है और किसानों की चिंता दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है.
जिले में पूरे जून महीने के दौरान एक दिन भी अच्छी बारिश नहीं हुई है. इसका सीधा असर धान की खेती पर पड़ रहा है. अधिकांश किसान अब तक खेतों में धान के बिचड़े भी नहीं डाल पाए हैं. जिन किसानों ने किसी तरह सिंचाई कर बिचड़े तैयार किए हैं, वे भी भीषण गर्मी की वजह से खराब होने लगे हैं.
आखिर क्यों बढ़ रही है किसानों की चिंता?
किसानों का कहना है कि खेतों में पर्याप्त नमी नहीं होने से धान की खेती का पूरा चक्र प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो धान की रोपनी में देरी तय मानी जा रही है.
शिशवा गांव के किसान पप्पू यादव और बासुदेवपुर के किसान चलितर यादव बताते हैं कि डीजल पंप से सिंचाई करना बेहद महंगा पड़ रहा है. कई इलाकों में अब भी बिजली की समुचित व्यवस्था नहीं है. ऐसे में खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है.
भीषण गर्मी ने बढ़ाई मुश्किल
मौसम की बेरुखी सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं है. एक ओर बारिश नहीं हो रही है, वहीं दूसरी तरफ सूरज लगातार आग उगल रहा है. जिले का अधिकतम तापमान प्रतिदिन 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है.
हालात ऐसे हैं कि रात में भी लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल रही है. लगातार बढ़ते तापमान का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है. अस्पतालों में गर्मी से संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है.
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अब तक मॉनसून का नहीं मिला कोई संकेत
गोगरी समेत जिले के कई इलाकों में कभी-कभार छिटपुट बारिश जरूर हुई है, लेकिन अच्छी वर्षा अब तक नहीं हुई है. आसमान में बादल तो दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ मिनट बूंदाबांदी के बाद मौसम फिर साफ हो जाता है.
दिनभर आसमान साफ रहने से तेज धूप लोगों और किसानों दोनों की परेशानी बढ़ा रही है. ऐसे में जिले के हजारों किसानों की निगाहें अब भी आसमान पर टिकी हुई हैं.
Khagaria Monsoon : जून का अंतिम सप्ताह क्यों है अहम?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान की खेती के लिए जून का अंतिम सप्ताह और जुलाई का पहला पखवाड़ा बेहद महत्वपूर्ण होता है. यदि इस अवधि में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो धान उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई, जिसके कारण बिचड़ा डालने का कार्य अधूरा रह गया है. कृषि विभाग ने किसानों को मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखने और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की सलाह दी है.
मौसम की बेरुखी का असर अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है. खेतों में काम कम होने से खेतिहर मजदूरों को भी पर्याप्त रोजगार नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में जिले के किसान अब सिर्फ एक अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जो उनके खेतों में हरियाली और चेहरे पर मुस्कान लौटा सके.
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