पहले आंधी ने आम के टिकोले गिराया, अब मधुआ व डंठल कीट से किसान परेशान
आम उत्पादक किसान कीटनाशक दवाओं का लगातार छिड़काव कर टिकोले बचाने में जुटे हैं.
गोगरी. इस वर्ष आम की फसल से आम उत्पादक किसानों एवं व्यापारियों के चेहरे पर रौनक देखी जा रही है, लेकिन किसानों को आम के टिकोले बचाने में पसीना छूट रहा है. आम के फसल में मधुआ रोग एवं डंठल छेदक कीट के प्रकोप के कारण काफी मात्रा में टिकोले पेड़ से गिर रहे हैं. इससे किसानों को फसल बचाने की चिंता भी सता रही है. हालांकि, आम उत्पादक किसान कीटनाशक दवाओं का लगातार छिड़काव कर टिकोले बचाने में जुटे हैं. इससे उनपर अधिक खर्च का दवाब बढ़ रहा है. जिला पौधा संरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि समय से पूर्व अधिक तापमान बढ़ने एवं तेज धूप के कारण आम के टिकोले के डंठल के पास एक विशेष प्रकार के कीट का प्रकोप बढ़ रहा है. इससे आम के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है. इसके लिए समय-समय पर आम उत्पादक किसानों को फसल में लगने वाली कीट-व्याधी से बचाव को लेकर जानकारी दी जाती है. बताया गया कि इस वर्ष साल के शुरुआत से ही अधिक गर्मी के कारण आम के पेड़ों पर पर्याप्त मंजर लगे थे. आम के टिकोले भी काफी लगे हैं, लेकिन अधिक गर्मी के कारण कीट का प्रकोप किसानों की परेशानी बढ़ा रहे है. इससे बचाव का एक मात्र उपाय किसी भी प्रकार का कीटनाशक का नियमित अंतराल पर छिड़काव है.
बारिश के बाद मधुआ कीट का प्रकोप कम होने की संभावना
आम उत्पादक किसान ने बताया कि इस साल आम का फसल काफी अच्छा आया है. किसानों को अच्छी आमदनी होने की उम्मीद थी, लेकिन मौसम की प्रतिकूल स्थिति के कारण आम का फसल बचाना काफी मुश्किल हो रहा है. पहले तो भीषण गर्मी के कारण आम के दाने झर गए हैं. बचे टिकोले भी तेज आंधी के कारण गिर कर बर्बाद हो गए. मधुआ कीट का अधिक प्रकोप के कारण किसानों एवं व्यापारियों को दवा का लगातार छिड़काव करना पड़ रहा है. कीटनाशक दवाओं के छिड़काव का भी असर नहीं पड़ रहा है. इससे परेशानी काफी बढ़ गयी है. हालांकि बारिश होने के बाद मधुआ एवं अन्य कीट का प्रकोप कम होने की संभावना है.जिले के कई प्रखंडों में होता है बड़े पैमाने पर आम का उत्पादन
जिला पौधा संरक्षण पदाधिकारी ने बताया कि जिले के बौरना, महद्दिपुर, पसराहा, परबत्ता समेत विभिन्न प्रखंडों में वृहत पैमाने पर आम के बगीचे हैं. इन प्रखंडों में आम का पैदावार काफी होता है. बताया गया कि जिले में आम उत्पादन के लिए बौरना और महद्दिपुर गांव प्रथम स्थान पर है. बौरना समेत आसपास के गांव के लोगों के आय का मुख्य श्रोत ही आम का बगीचा है. उन क्षेत्रों में आम उत्पादक किसानों को समय समय पर कीट के प्रकोप से बचाव की जानकारी के लिए कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है. बताया गया कि टिकोले के बचाव के लिए किसानों को नियमित तौर पर प्लानोफिक्स नामक कीटनाशक दवा का तीन से चार लीटर पानी में प्रति एक एमएल की मात्रा का छिड़काव करना चाहिए. इसके साथ ही अच्छी किस्म के पोषक टॉनिक का छिड़काव भी जरूरी है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
