शराब का विकल्प बन रही है नशीली दवा

गोगरी. सूबे में शराब बंदी पर अमल होते ही नशे के आदी युवा वर्ग अब नशीली दवाईयों के गिरफ्त में जा रहे हैं. नशीली दवाईयों की बिक्री में बढ़ोतरी हो गयी है. नशे के आदी हो चुके युवाओं की शाम होते ही शराब नहीं मिलने से परेशानी बढ़ जाती है. विकल्प के तौर पर वे […]

गोगरी. सूबे में शराब बंदी पर अमल होते ही नशे के आदी युवा वर्ग अब नशीली दवाईयों के गिरफ्त में जा रहे हैं. नशीली दवाईयों की बिक्री में बढ़ोतरी हो गयी है. नशे के आदी हो चुके युवाओं की शाम होते ही शराब नहीं मिलने से परेशानी बढ़ जाती है. विकल्प के तौर पर वे नशीली दवाईयां खरीदकर उसका सेवन करते हैं. कुछ दवा के कारोबारी युवाओं की इस मजबूरी का लाभ उठा रहे हैं. नियम कानून को ताक पर रखकर वे कफ सीरप के अलावे नशीली दवाई व सूई बेच रहे हैं.

बाजार में फोर्टवीन, कंपोज जैसी सूई उपलब्ध है. इन सूई को लेने के बाद कई घंटों तक नशा रहता है. कफ सीरप में लिरेक्स ने इन दिनों कोरेक्स को भी मात दे दिया है. युवाओं में ज्यादा लिरेक्स को पसंद किया जा रहा है. अल्प्राजोलेम कंपोजिशन की 50 ब्रांड की दवाईयां बाजार में आसानी से उपलब्ध है. इसके खाने से नशा होता है.भले ही दवाईयां शराब का विकल्प बन गयी हो, पर इसके सेवन के साइड इफेक्ट से युवा वर्ग अनजान बना है. चिकित्सकों की मानें तो ये दवाईयां, लीवर एवं किडनी को डैमेज कर सकती है.

डायजिस्टिंग सिस्टम खराब हो सकता है. हालांकि कैमिस्ट एवं ड्रगिस्ट इस बात को लेकर संवेदनशील है.
गोगरी रेफरल अस्पताल के फिजिसियन डॉक्टर मुरारी पौद्दार ने बताया कि नशीली दवाईयों की बिक्री बगैर चिकित्सक के परामर्श के न करें. इस संदर्भ में जिलाधिकारी ने केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट की बिक्री का औषधि नियंत्रक द्वारा लेखा जोखा रखने का भी निर्देश दिया है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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