ऐतिहासिक है बलैठा की दुर्गा मंदिर, आस्था ने बनाया शक्तिपीठ

ऐतिहासिक है बलैठा की दुर्गा मंदिर, आस्था ने बनाया शक्तिपीठ फोटो 5 मेंकैप्सन: मंदिर का दृश्यबेलदौर. प्रखंड का सबसे पुराना बलैठा का दुर्गा मंदिर अपने गर्भ में कई ऐतिहासिक धरोहर समेटे हुए है. श्रद्धालुओं के दशकों से बढ़ती आस्था ने इस मंदिर को एक शक्तिपीठ की पहचान दे दी. लगभग सौ साल पहले जब गांव […]

ऐतिहासिक है बलैठा की दुर्गा मंदिर, आस्था ने बनाया शक्तिपीठ फोटो 5 मेंकैप्सन: मंदिर का दृश्यबेलदौर. प्रखंड का सबसे पुराना बलैठा का दुर्गा मंदिर अपने गर्भ में कई ऐतिहासिक धरोहर समेटे हुए है. श्रद्धालुओं के दशकों से बढ़ती आस्था ने इस मंदिर को एक शक्तिपीठ की पहचान दे दी. लगभग सौ साल पहले जब गांव के लोग दशहरा मेला देखने सोनवर्षा राज जाते थे तब वहां राजा हरिवल्लभ सिंह का शासन था. राजा के सिपाहियों ने बलैठा के लोगों को मेला में आकर पूजा करने से मना कर दिया. दुखी होकर ग्रामीणों ने उक्त स्थल पर मां दुर्गा की कच्ची मंदिर बनाकर पूजा अर्चना शुरू कर दी . माता की पिंडी स्थापित होते ही गांव की समृद्धि बढ़ने लगी. लगातार कोसी कटाव के प्रलय झेलने के बावजूद गांव में खुशहाली बरकरार रही . कोसी से सिंचित हुई भूमी पीला सोना (मक्का ) उगलने लगी. किसान के साथ-साथ गांव के मजदूर भी खुशहाल रहने लगे. मंदिर व मां शक्ति के चमत्कार ने लोगों को कई बार इसका अहसास भी कराया. गांव के नंदु यादव के पोते को ऐसी बीमारी हो गयी थी जिसका इलाज पटना के डा‍ॅक्टर भी कर पाने में असमर्थ हो गये तो मायूस हो उसके परिजनों ने मां के गहवर (पूजा घर) में उस बीमार बालक को मंदिर का भस्म लगाकर नीर पिलाया. तो गंभीर रोग से ग्रसित बालक ठीक हो गया. इसके अलावा भी कई चमत्कार हुए जिसके कारण श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर से हो गयी है. अब बलैठा की मां दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं की शक्तिपीठ बन गयी है. ग्रामीणों की मान्यता है कि उक्त शक्तिपीठ में सच्चे मन से की गयी कामना पूरी होती है. गांव के जागो सिंह ने बताया कि दशकों पूर्व मंदिर के पास भागीरथी नदी बहती थी जिसके समीप पूर्वजों ने अनुष्ठान कर मां के पिंडी को स्थापित किया था लेकिन 1987 के प्रलंयकारी बाढ़ में भागीरथी नदी का अस्तित्व मिट गया लेकिन मां का मंदिर एवं पिंडी को कुछ नहीं हुआ. प्रखंड का पहला मंदिर में परंपरा को लेकर भी काफी चर्चित है. मुसलिम समुदाय के लोग बढ़ चढ़कर मेले में भाग लेते है. यहां की बली देखने के लिए प्रखंड समेत दूर-दराज से लोग आते हैं. कोसी के किनारे अवस्थित इस मंदिर में श्रद्धालुओं की काफी आस्था है . मेला के बेहतर आयोजन को लेकर ग्रामीणों ने 15 सदस्यीय कमेटी भी गठित किया है . कमेटी के अध्यक्ष विभूति झा एवं सचिव उमेश प्रसाद सिंह ने बताया कि दशहरा मेला के अवसर पर नवमी की रात भक्ति जागरण एवं श्रद्धालुओं के लिए मनोरंजन का भी आयोजन किया जाता है.

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