संसाधन के अभाव से जूझ रहे क्रिकेट खिलाड़ी

खगड़िया : भारत में क्रिकेट लोकप्रिय है ऐसा माना जाता है. इस खेल की दीवानगी युवाओं पर बढ़-चढ़ कर बोल रहा है. स्थानीय युवा भी इससे अछूता नहीं है किंतु दुर्भाग्य की बात यह है कि यहां के खिलाड़ियों को सुविधा व संसाधन हासिल नहीं हो पा रहा है. इस कारण खगड़िया में क्रिकेट की […]

खगड़िया : भारत में क्रिकेट लोकप्रिय है ऐसा माना जाता है. इस खेल की दीवानगी युवाओं पर बढ़-चढ़ कर बोल रहा है. स्थानीय युवा भी इससे अछूता नहीं है किंतु दुर्भाग्य की बात यह है कि यहां के खिलाड़ियों को सुविधा व संसाधन हासिल नहीं हो पा रहा है. इस कारण खगड़िया में क्रिकेट की लोकप्रियता घटती जा रही है.
अगर यहां के खिलाड़ियों को सुविधा उपलब्ध करायी जाये तो शायद इस जिला का नाम क्रिकेट के ऐतिहासिक पन्नों पर दर्ज हो सकता है. 90 के दशक में स्थानीय खिलाड़ियों ने खगड़िया का नाम दूसरे प्रांतों में भी रोशन किया था. किंतु बिहार क्रिकेट संघ की मान्यता खत्म होने के बाद खगड़िया में क्रिकेट स्थानीय क्लबों तक सिमट कर रह गया.
कभी छाया रहता था जिले में क्रिकेट
90 के दशक में भारतीय क्रिकेट संघ से बिहार क्रिकेट संघ को मान्यता प्राप्त थी. तब जिले में क्रिकेट खिलाड़ियों ने ढेर सारी उपलब्धियों बटोरी थी. जिले के कई खिलाड़ियों का चयन राज्य स्तरीय अंडर 16 टीम में भी हुआ था. वर्ष 2001 के बाद तो खगड़िया की टीम सिर्फ कागज पर सिमट कर रह गयी.
कहते हैं स्थानीय खिलाड़ी: यहां के खिलाड़ियों को निराशा हाथ लगी है. खिलाड़ी पवन कुमार, अशोक कुमार, प्रेम कुमार, जावेद अली ने कहा कि बिहार क्रिकेट संघ को मान्यता मिलती है तो खगड़िया क्रिकेट के क्षेत्र में पुन: वापसी कर यहां के खिलाड़ी राज्य व देश में अपनी प्रतिभा बिखेरेंगे. यहां के खिलाड़ियों ने जनप्रतिनिधियों का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए भारतीय क्रिकेट संघ से बिहार क्रिकेट संघ को मान्यता दिलाने में आगे आने की मांग की है, जिससे युवा खिलाड़ी का भविष्य अंधकार में नहीं डूबे. जबसे बिहार क्रिकेट संघ की मान्यता समाप्त हुई, तब से स्थानीय क्रिकेटरों की प्रतिभा कुंठित हो गयी है. बिहार क्रिकेट संघ में गुटबाजी स्थानीय खिलाड़ियों की सफलता को कुंठित कर रही है.
प्रतिभाएं हो रहीं हैं कुंठित
इन दिनों खगड़िया में क्रिकेट स्थानीय क्लबों तक सिमट कर रह गया है. क्रिकेट जगत में कभी खगड़िया का नाम बड़े-बड़े शहरों जाना जाता था, किंतु अब इस जिला का नाम दूसरे जिलों के लिए प्रेरणास्नेत नहीं रह गया. इसमें कोई शक नहीं है की छोटा जिला होने के बाद भी खगड़िया के खिलाड़ियों में प्रतिभाएं भरी हुई है. अगर भारतीय क्रिकेट संघ से बिहार क्रिकेट संघ को मान्यता मिल जाती है तो खगड़िया के खिलाड़ी बिहार ही नहीं बल्कि देश में अपनी प्रतिभा बिखेरेंगे.
जेएनकेटी में जुटती थी भीड़: नब्बे के दशक में जननायक कपरूरी ठाकुर इंटर विद्यालय मैदान पर क्रिकेट खेल प्रेमियों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ पड़ती थी. तब बिहार क्रिकेट तत्वावधान में आयोजित हेमन ट्रॉफी ए डिविजन, हेमन ट्रॉफी बी डिवीजन, अंडर 19, अंडर 16 के मैच को देखने के लिए खेल प्रेमियों की भीड़ उमड़ पड़ती थी.
कभी था गुलजार, आज है अंजान
अब यह मैदान खेल प्रेमियों के लिए अंजान बन चुका है. खेलप्रेमी खेल का आनंद उठाने के लिए तरस रहे हैं, लेकिन क्रिकेट खेल को मान्यता नहीं होने के कारण जिले में संघ के द्वारा आयोजन नहीं किया जा रहा है.

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