चौथम. अंचल क्षेत्र अंतर्गत भूमिहीन लाभार्थियों को सरकार की ओर से बासगीत के लिए दिया गया परचा मिलने के बाद भी ये लोग अपनी जमीन पर अब तक दखल नहीं पा सके हैं, जबकि परचाधारी जमीन पर दखल कब्जा के लिए अंचल से जिला कार्यालय का दौड़ लगाते थक हार चुके हैं. बावजूद प्रशासनिक पदाधिकारी परचा धारियों को दखल का हक दिलाने में नाकामयाब रही है. विदित हो कि जमीन से बेदखल परचा धारियों में अधिकांश लाभार्थी दलित महादलित परिवार से आते हैं. ऐसे में अंचल के सैकड़ों महादलित परिवार बासगीत परचा से बेदखल हो कर पुनर्वास की समस्या की मार वर्षों से झेलते आ रहे हैं. प्रशासनिक उदासीनता की बात की जाय, तो अंचल के 10 ऐसे पुनर्वासित गांव जय प्रभा नगर जवाहर टोला, हरदिया पुनर्वास कमरी डिढ़की है. जहां सरकार द्वारा छह दशक पूर्व पुनर्वासित तो किया गया. लेकिन बासगीत परचा नहीं दिया गया है. बासगीत परचा के बगैर उपर्युक्त गांव वाले को इंदिरा आवास लाभ से भी वंचित होना पड़ रहा है. जमीन से बेदखल परचा धारियों का मानना है कि जमीन पर दबंगों का कब्जा है. जिसे मुक्त कराने में प्रशासन आज तक सक्षम नहीं हो पा रही है. अंचलाधिकारी रमण प्रसाद वर्मा ने बताया कि बेदखल परचा धारियों को जमीन पर दखल दिलाने हेतु हर पंचायत में 21 नवंबर से 19 दिसंबर तक शिविर लगा कर सर्वे किया जायेगा.
परचा मिला, जमीन पर दखल नहीं
चौथम. अंचल क्षेत्र अंतर्गत भूमिहीन लाभार्थियों को सरकार की ओर से बासगीत के लिए दिया गया परचा मिलने के बाद भी ये लोग अपनी जमीन पर अब तक दखल नहीं पा सके हैं, जबकि परचाधारी जमीन पर दखल कब्जा के लिए अंचल से जिला कार्यालय का दौड़ लगाते थक हार चुके हैं. बावजूद प्रशासनिक पदाधिकारी […]
